उत्तराखंड में मानसून का कहर: केदारनाथ के बाद सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान,

देहरादून: पर्वतीय राज्य उत्तराखंड इस साल भी मानसून की विभीषिका से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान माना जा रहा है। उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों में बादल फटने, अतिवृष्टि और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुरुआती आकलन के अनुसार, अब तक राज्य को 5000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

पौड़ी जिले में 2008 संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुईं और 77.46 करोड़ का नुकसान दर्ज हुआ है। 486 सड़कें और 770 बिजली लाइनें टूट गईं, जबकि 156 स्कूल भवनों को क्षति पहुंची है।

उत्तरकाशी में आपदा ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया, जहां 18 लोगों की मौत, 70 लापता और 360 भवन क्षतिग्रस्त हुए। अकेले धराली क्षेत्र में बहुमंजिला होटल, होमस्टे और मवेशियों सहित 200 करोड़ से अधिक की संपत्ति बह गई।

टिहरी जिले में आपदा से 70 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि चमोली में 11 लोगों की मौत और 214 सड़कों को भूस्खलन से नुकसान पहुंचा।

रुद्रप्रयाग में 212 से अधिक पेयजल योजनाएं तबाह हो गईं, जिससे जल संस्थान को चार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, जिलों से रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि नुकसान की भरपाई के लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा।

यह स्पष्ट है कि प्राकृतिक आपदाएं हर साल उत्तराखंड की विकास योजनाओं को गहरा धक्का देती हैं। अगर यह धन विकास कार्यों में खर्च होता तो कई अस्पताल, स्कूल और सड़कें बन सकती थीं।

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