Muzaffarpur Hospital Fire: मौतों की संख्या पर सस्पेंस, जांच शुरू

Muzaffarpur Hospital Fire

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। Muzaffarpur Hospital Fire के बाद मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। घटना के कई घंटे बाद भी मृतकों की वास्तविक संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी है।

परिजनों का आरोप- अस्पताल प्रशासन ने शवों को छिपाया

घटना स्थल पर मौजूद कई परिजनों ने आरोप लगाया कि आग लगने के बाद अस्पताल प्रशासन ने कुछ मरीजों और शवों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उनका दावा है कि कई मरीजों को जल्दबाजी में अन्य अस्पतालों में भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इन आरोपों के चलते Muzaffarpur Hospital Fire को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

आईसीयू तक पहुंचने में हुई भारी परेशानी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अस्पताल की ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया था। पांचवें तल पर स्थित आईसीयू में फंसे मरीजों को बाहर निकालने के लिए दमकल कर्मियों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़ने पड़े। ऑक्सीजन सपोर्ट पर मौजूद मरीजों की स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है। यही कारण है कि Muzaffarpur Hospital Fire में मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

डीएम ने क्या कहा?

मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन का कहना है कि राहत एवं बचाव कार्य पूरी गंभीरता से किया गया। जिला अधिकारी ने बताया कि सभी मरीजों की जानकारी जुटाई जा रही है और किसी भी शिकायत की जांच कराई जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है। हालांकि Muzaffarpur Hospital Fire के बाद उठे सवालों का जवाब मिलने का इंतजार अभी भी जारी है।

सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का किया ऐलान

बिहार सरकार ने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। सरकार ने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश भी दिए हैं। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान का कार्य जारी है और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया गया है।

घटना की निष्पक्ष जांच की मांग तेज

स्थानीय लोगों और परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि Muzaffarpur Hospital Fire में हुई लापरवाही सामने आनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पूरे राज्य की नजर जांच रिपोर्ट और आधिकारिक आंकड़ों पर टिकी हुई है।

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