Bombay High Court ने मनोज जरांगे से मांगा हलफनामा, मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा और संपत्ति नुकसान पर जवाब
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे से हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन है। जरांगे ने कोर्ट में कहा कि उनका आंदोलन अब समाप्त हो चुका है क्योंकि सरकार के साथ सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने जरांगे की बात को स्वीकार किया, लेकिन यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान हुई अन्य घटनाओं और शिकायतों पर जवाब देना जरूरी है। जरांगे की ओर से पेश हुए वकील सतीश मानशिंदे और वी.एम. थोराट ने कोर्ट को बताया कि आंदोलन शांतिपूर्ण था और केवल आम जनता को असुविधा हुई, संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जरांगे और उनकी टीम को हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें साफ लिखा हो कि वे किसी भी हिंसा या तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। यदि हलफनामा सही तरीके से नहीं दाखिल किया गया, तो अदालत उन्हें उपद्रव भड़काने वाला मान सकती है।
जरांगे ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और फैसले पर भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठाओं को आरक्षण मिलेगा, और अब तक की भूख हड़ताल के बाद यह उनकी जीत है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने सहित उनकी अधिकांश मांगें मान ली हैं, जिससे उन्हें ओबीसी आरक्षण के तहत शिक्षा और नौकरी में लाभ मिलेगा।
भूख हड़ताल खत्म होने के बाद जरांगे को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। जरांगे ने कहा कि मराठा समाज के लिए किए गए फैसले का श्रेय पूरी तरह से समुदाय को जाता है और अब कोई भी मराठा आरक्षण से वंचित नहीं रहेगा।