डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधों के स्वरूप में निरंतर परिवर्तन देखा जा रहा है। रायपुर जिले के टिकरापारा थाना क्षेत्र में सामने आया ताजा प्रकरण इस प्रवृत्ति को रेखांकित करता है, जहां एक युवक को RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। इस घटना में आरोपी द्वारा भेजी गई APK फाइल के माध्यम से बैंक खाते से 7 लाख 42 हजार 209 रुपये की अनधिकृत निकासी की गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पीड़ित को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा संपर्क कर यह बताया गया कि उसके नाम पर लंबित ई-चालान है, जिसे शीघ्र जमा करना आवश्यक है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आरोपी ने एक मोबाइल एप्लिकेशन के रूप में APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने के निर्देश दिए। पीड़ित द्वारा उक्त फाइल को इंस्टॉल करते ही मोबाइल डिवाइस की सुरक्षा प्रणाली प्रभावित हो गई।
तकनीकी दृष्टि से, APK फाइल के माध्यम से डिवाइस में मैलवेयर स्थापित किया गया, जिससे साइबर अपराधियों को उपयोगकर्ता की संवेदनशील जानकारी, जैसे बैंकिंग विवरण और OTP तक पहुंच प्राप्त हो गई। इसके पश्चात खाते से क्रमिक रूप से राशि का अंतरण किया गया, जिससे कुल 7.42 लाख रुपये की निकासी दर्ज की गई।
घटना के बाद पीड़ित द्वारा टिकरापारा थाना में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस विभाग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच प्रारंभ कर दी है तथा डिजिटल ट्रांजेक्शन के स्रोत और संदिग्ध खातों की पहचान की जा रही है। साथ ही साइबर विशेषज्ञों की सहायता से तकनीकी विश्लेषण भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में उपयोगकर्ताओं को केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करने की सलाह दी जाती है। अज्ञात स्रोतों से प्राप्त लिंक या फाइलों को डाउनलोड करना वित्तीय जोखिम को बढ़ाता है। यह प्रकरण नागरिकों के लिए साइबर सतर्कता के महत्व को पुनः स्थापित करता है।