छत्तीसगढ़ में बढ़ते तापमान के साथ बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे राज्य की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। वर्तमान स्थिति में बिजली की खपत 6700 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जबकि राज्य के अपने उत्पादन संयंत्रों से आपूर्ति सीमित बनी हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विद्युत संयंत्रों से वर्तमान में लगभग 2300 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके विपरीत, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए लगभग 4300 मेगावाट बिजली केंद्रीय क्षेत्र से प्राप्त की जा रही है, जबकि निजी स्रोतों से भी अतिरिक्त आपूर्ति ली जा रही है। इस प्रकार कुल मांग की पूर्ति बाहरी स्रोतों पर निर्भर होकर की जा रही है।
गर्मी के तीव्र प्रभाव के चलते एयर कंडीशनर, कूलर एवं अन्य शीतलन उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है, जिससे दिन और रात्रि दोनों समय बिजली की खपत में निरंतर वृद्धि हो रही है। दिन के समय खपत 6400 से 6500 मेगावाट तक दर्ज की जा रही है, जबकि पीक ऑवर में यह 6700 मेगावाट से अधिक हो रही है। अनुमान है कि आगामी दिनों में यह आंकड़ा 7500 मेगावाट तक पहुंच सकता है।
उत्पादन क्षमता के संदर्भ में राज्य के संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता लगभग 2960 मेगावाट है, किन्तु तकनीकी कारणों एवं संयंत्रों के बंद रहने से वास्तविक उत्पादन 2100 से 2300 मेगावाट के बीच सीमित है। हाल ही में कुछ संयंत्रों के अस्थायी रूप से बंद होने से आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न हुआ है।
विद्युत विभाग द्वारा यह दावा किया गया है कि वर्तमान मांग को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है, किन्तु यदि उत्पादन संयंत्रों में और बाधाएं उत्पन्न होती हैं, तो विद्युत कटौती की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। पूर्व अनुभवों के आधार पर, ऐसी स्थिति में औद्योगिक क्षेत्र की आपूर्ति प्राथमिक रूप से प्रभावित हो सकती है।