छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती विवाद में चल रही CGPSC जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और नकदी बरामद होने के बाद जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
कई शहरों में एक साथ छापेमारी से मचा हड़कंप
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के तहत ईडी ने रायपुर, भिलाई समेत प्रदेश के कई शहरों में एक साथ कार्रवाई की। सूत्रों के मुताबिक नौ अलग-अलग स्थानों पर की गई इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य CGPSC जांच को नए साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाना था।
जांच के दौरान कई पूर्व अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों की तलाशी ली गई। एजेंसी ने घंटों तक दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की प्रक्रिया जारी रखी।
उत्कर्ष चंद्राकर के ठिकाने से मिली नकदी
ईडी की कार्रवाई के दौरान पूर्व पीएससी अध्यक्ष से जुड़े बताए जा रहे उत्कर्ष चंद्राकर के ठिकाने से करीब आठ लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं।
यह बरामदगी CGPSC जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि एजेंसी अब इन वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
डिजिटल उपकरणों से मिल सकते हैं अहम सुराग
छापेमारी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल स्टोरेज डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियां इन उपकरणों में मौजूद डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो CGPSC जांच को निर्णायक दिशा दे सकते हैं। ईडी अब डेटा रिकवरी और डिजिटल फोरेंसिक जांच पर विशेष ध्यान दे रही है।
कई पूर्व अधिकारियों पर जांच एजेंसियों की नजर
ईडी की कार्रवाई जिन लोगों तक पहुंची, उनमें आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत खलखो समेत कई अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि जांच एजेंसियों ने आधिकारिक रूप से किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है, लेकिन CGPSC जांच के दायरे में आने वाले सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है।
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि CGPSC जांच के निष्कर्ष भविष्य में भर्ती तंत्र में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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