बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राबड़ी देवी सुरक्षा कटौती के मुद्दे ने सत्ता और विपक्ष के बीच नए विवाद को जन्म दे दिया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने सरकारी आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजकर सरकार के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।
राजनीतिक गलियारों में इस कदम को एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक कारणों से वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव कर रही है।
आवास के बाहर दिखा बदला हुआ माहौल
शनिवार को राबड़ी देवी के सरकारी आवास के बाहर सामान्य दिनों की तुलना में अलग स्थिति देखने को मिली। सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बताया जा रहा है कि राबड़ी देवी सुरक्षा कटौती से नाराज होकर उन्होंने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और विभिन्न दल इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
राजद ने सरकार पर लगाए राजनीतिक दुर्भावना के आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्षी नेताओं को लगातार दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।
राजद का दावा है कि राबड़ी देवी सुरक्षा कटौती केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और ऐसे कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।
लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में हुआ बदलाव
राज्य सुरक्षा समिति की सिफारिशों के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली पूर्व सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत दोनों नेताओं को विशेष सुरक्षा दल की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि राबड़ी देवी सुरक्षा कटौती से उनके सम्मान और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है विवाद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है। राजद नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि स्थिति नहीं बदली गई तो पार्टी के अन्य नेता भी सरकारी सुरक्षा वापस करने पर विचार कर सकते हैं।
ऐसे में राबड़ी देवी सुरक्षा कटौती का मामला केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीतिक लड़ाई का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।
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