छत्तीसगढ़ सरकार कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाश रही है। इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बासमती धान मिशन इसी दिशा का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं कृषि विभाग ने प्रारंभिक कार्यवाही भी शुरू कर दी है।
उच्चस्तरीय बैठक में बनी रणनीति
नवा रायपुर में इस विषय पर बैठक आयोजित हुई। साथ ही कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विस्तृत चर्चा की। बासमती धान मिशन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसलिए संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारी के निर्देश दिए गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही मांग
बासमती और सुगंधित चावल की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। दरअसल यूरोपीय देशों में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। इसके अलावा निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हैं। नतीजतन किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकता है।
उपयुक्त क्षेत्रों की होगी पहचान
राज्य में ऐसे क्षेत्रों का चयन किया जाएगा जहां जलवायु अनुकूल हो। वहीं दूसरी ओर तापमान और मिट्टी की गुणवत्ता का भी अध्ययन होगा। बासमती धान मिशन के तहत चयनित क्षेत्रों में खेती का विस्तार किया जाएगा। साथ ही किसानों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
विपणन और निर्यात व्यवस्था पर जोर
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने सहयोग का आश्वासन दिया। इसके बाद बायबैक और विपणन व्यवस्था पर चर्चा हुई। बासमती धान मिशन के अंतर्गत उत्पादन से निर्यात तक समन्वित व्यवस्था विकसित होगी। कुल मिलाकर यह पहल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बन सकती है।
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