LPG बायोमेट्रिक आधार से बल्क FD तक: अक्टूबर के बदलाव असर किस पर

LPG बायोमेट्रिक आधार सत्यापन के लिए डिलीवरी के समय फिंगरप्रिंट स्कैनर पर उंगली रखता उपभोक्ता, मूल इलस्ट्रेशन

अक्टूबर 2026 की शुरुआत कई नियमों के बदलने से हो रही है. इनमें सबसे ज़्यादा घरों को छूने वाला बदलाव LPG बायोमेट्रिक आधार से जुड़ा है. वहीं बैंक, बच्चों के आधार, जन्म पंजीकरण, UPI और NRI संपत्ति सौदों के नियम भी बदले हैं. इस लेख में समझिए कि हर बदलाव की वजह क्या है और यह किसे प्रभावित करता है.

LPG बायोमेट्रिक आधार की शर्त किस पर लागू है

यह शर्त उन सभी घरेलू गैस उपभोक्ताओं पर है, जो सरकारी सब्सिडी वाले दाम पर सिलेंडर लेना चाहते हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय ने 19 सितंबर को बताया कि 1 अक्टूबर 2026 से उंगली या आंख से आधार सत्यापन के बिना यह दाम नहीं मिलेगा. बिना सत्यापन वाले ग्राहक सिलेंडर तो ले सकेंगे, पर बाज़ार भाव पर.

एक नज़र में: कौन-सा बदलाव किस वर्ग के लिए

  • रसोई गैस वाले परिवार: सब्सिडी के लिए LPG बायोमेट्रिक आधार सत्यापन.
  • माता-पिता: बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की विशेष मुफ्त अवधि 30 सितंबर को खत्म.
  • बड़े जमाकर्ता: बल्क FD दरों का रोज़ सार्वजनिक खुलासा.
  • दुकानदार: 15 अक्टूबर से ऊंची रकम वाले UPI भुगतान पर MDR.
  • NRI से संपत्ति खरीदने वाले: TAN की जगह PAN से TDS.

सरकार ने गैस सब्सिडी पर यह सख्ती क्यों की

मंत्रालय के मुताबिक असली वजह सब्सिडी वाले सिलेंडरों का गलत इस्तेमाल रोकना है. दरअसल, घरेलू सिलेंडर कई बार होटल या कारखानों तक पहुंच जाते हैं. इसके अलावा एक ही व्यक्ति के नाम पर दो कनेक्शन भी पकड़े जाते रहे हैं. ऐसे में LPG बायोमेट्रिक आधार की जांच से इन मामलों को छांटना आसान होता है.

खास बात यह है कि द प्रिंट के अनुसार यह अभियान अक्टूबर 2023 में शुरू हुआ था. फिर 19 सितंबर 2026 तक 27.43 करोड़ सक्रिय ग्राहक, यानी करीब 89.9%, जुड़ चुके थे. इसका मतलब है कि लगभग हर दस में से एक उपभोक्ता का सत्यापन अभी बाकी था. साथ ही इसी रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में 14.2 किलो सिलेंडर पर छिपी सब्सिडी लगभग ₹210 थी.

LPG बायोमेट्रिक आधार का काम कहां पूरा होगा

मंत्रालय ने कहा है कि यह नियम किसी असली परिवार को गैस से दूर करने के लिए नहीं है. सबसे पहले, सत्यापन सिलेंडर पहुंचाने आए कर्मचारी के पास हो सकता है. वहीं वितरक के दफ्तर में भी यह सुविधा है. इसके अलावा द प्रिंट ने इंडियनऑयल वन, हैलोबीपीसीएल और एचपी पे जैसे ऐप का भी ज़िक्र किया है. खासकर बुज़ुर्ग सदस्यों के लिए घर पर डिलीवरी के समय यह तरीका आसान रहेगा.

बच्चों के आधार में बदलाव क्यों ज़रूरी है

पांच साल से कम उम्र में बच्चे की उंगलियों के निशान और आंख की पुतली दर्ज नहीं की जाती. दरअसल, ये अंग तब तक पूरी तरह विकसित नहीं होते. इसलिए UIDAI 5 और 15 साल की उम्र पर बायोमेट्रिक अपडेट करवाने को कहता है. अगर यह न हो, तो स्कूल दाखिले, छात्रवृत्ति और परीक्षा पंजीकरण में दिक्कत आ सकती है.

फिलहाल इस साल UIDAI ने विशेष अभियान में यह सुविधा 30 सितंबर तक मुफ्त रखी थी. हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार इसके बाद प्रति अपडेट ₹125 देने पड़ सकते हैं. लेकिन नियमित फीस सूची में 5-7 और 15-17 साल वाले अपडेट पहले से मुफ्त हैं. लिहाज़ा शुल्क बच्चे की उम्र पर निर्भर करेगा.

RBI ने बड़ी जमा पर पारदर्शिता क्यों मांगी

RBI ने जून 2026 में इसका मसौदा रखा था. फिर सुझाव लेकर 30 जुलाई को अंतिम निर्देश जारी किए. इनके तहत बैंक बल्क डिपॉज़िट की दरें हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक, अधिकतम 10:10 बजे तक, अपनी साइट पर दिखाएंगे. साथ ही शाखा बदलने से दर नहीं बदलनी चाहिए.

इसका सीधा फायदा बड़े जमाकर्ता को मिलेगा, जो अब दरों की तुलना आसानी से कर सकेगा. बिज़नेस टुडे के अनुसार ₹3 करोड़ और उससे ऊपर की एकमुश्त जमा इस दायरे में आती है. वहीं आम बचत करने वाले की छोटी FD पर सीधा असर नहीं है.

जन्म-मृत्यु पंजीकरण में सख्ती की वजह

संसद से पास जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 2026 को अगस्त में राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली थी. आकाशवाणी के मुताबिक इसका मकसद देर से पंजीकरण को हतोत्साहित करना है. अब एक साल के बाद और दो साल के भीतर पंजीकरण पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट जांच के बाद आदेश देंगे. जबकि दो साल से पुराने मामले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के पास जाएंगे.

UPI शुल्क: दुकानदारों के लिए क्या मायने

MDR वह रकम है, जो भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी की तरफ से बैंकिंग व्यवस्था को जाती है. बिज़नेस टुडे और मोरुंग एक्सप्रेस के अनुसार NPCI ने 15 सितंबर को इसका ढांचा बताया. ₹2,000 से ऊपर के व्यापारी भुगतान पर 0.4% दर तय बताई गई है. उधर रेलवे और बीमा जैसी श्रेणियों के लिए अलग दरें हैं.

अब आम ग्राहक के लिए राहत यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा. हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लंबित है. साथ ही कुछ हिंदी रिपोर्ट इसे अभी प्रस्ताव कह रही हैं. इसलिए 15 अक्टूबर के करीब अपने बैंक से अंतिम स्थिति पूछना बेहतर होगा.

NRI संपत्ति सौदे में TAN हटाने का मतलब

किसी अनिवासी भारतीय से मकान खरीदने वाले को टैक्स काटकर जमा करना होता है. पहले इस एक सौदे के लिए भी अलग TAN लेना पड़ता था. सरकार की 22 सितंबर वाली अधिसूचना से 1 अक्टूबर से यह झंझट खत्म हो गया है. आउटलुक मनी के मुताबिक टैक्स की दर पहले जैसी ही है.

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है. कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले दस्तावेजों की जांच करें और आवश्यकता होने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लें.

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