रायपुर में 1 सितंबर से शुरू किया गया नो हेलमेट-नो पेट्रोल अभियान पहले ही दिन कमजोर पड़ गया। दावा था कि पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट आने वाले दोपहिया चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही रही। कई पंपों पर बाइक सवार बिना हेलमेट आसानी से पेट्रोल भरवा रहे हैं।
इस अभियान की शुरुआत रायपुर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने की थी। इसका मकसद था लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और दुर्घटनाओं को कम करना। एसोसिएशन ने उपमुख्यमंत्री डॉ. अरुण साव और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को ज्ञापन भी सौंपा था, जिसके बाद प्रशासन ने इसे समर्थन दिया था। भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में यह नियम पहले से ही लागू है। वहां बिना हेलमेट पंप पर पेट्रोल नहीं मिलता। रायपुर में भी यही व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं हो रहा।
रायपुर में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ट्रैफिक विभाग की रिपोर्ट बताती है कि मरने वालों में 60% से ज्यादा लोग हेलमेट नहीं पहनते। ऐसे में अभियान का सफल न होना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
पंप संचालकों का कहना है कि वे नियम मानने के पक्ष में हैं, लेकिन कई बार उपभोक्ताओं के विरोध के कारण परेशानी होती है। लोग पंप पर हंगामा करने लगते हैं और विवाद की स्थिति बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पंप संचालकों पर निर्भर रहने से यह अभियान सफल नहीं होगा। ट्रैफिक पुलिस को कड़ी निगरानी करनी होगी, चालान काटने होंगे और लोगों को लगातार जागरूक करना होगा।
युवाओं की प्रतिक्रिया इस नियम को लेकर मिली-जुली है। कुछ इसे सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी मानते हैं, लेकिन कई इसे बेवजह की पाबंदी बता रहे हैं। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई कड़ा कदम नहीं उठाया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ट्रैफिक विभाग और कलेक्टर मिलकर सख्त रणनीति अपनाएंगे।