केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर नई VB-G RAM-G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण) योजना लाने के प्रस्ताव ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने इसे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश बताते हुए इसके खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा जैसी योजना, जो करोड़ों गरीब और ग्रामीण परिवारों की आय का आधार रही है, उसे धीरे-धीरे समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए काम और सम्मान का अधिकार है।
इसी के विरोध में कांग्रेस ने 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत की है, जो 25 फरवरी तक चलेगा। पार्टी के अनुसार यह अभियान देश की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा और इसे एक व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बताया कि यह आंदोलन मजदूरी के अधिकार, समय पर काम की गारंटी और प्रशासनिक जवाबदेही को फिर से मजबूत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस अभियान की निगरानी के लिए एक समन्वय समिति बनाई गई है, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
कांग्रेस ने आम जनता से भी इस आंदोलन में जुड़ने की अपील की है। इसके लिए पार्टी ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जहां लोग राष्ट्रपति को भेजी जाने वाली याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। पार्टी की प्रमुख मांगों में प्रतिदिन न्यूनतम 400 रुपये मजदूरी, पंचायतों को अधिक अधिकार और मनरेगा की मूल भावना की रक्षा शामिल है।
इसके साथ-साथ कांग्रेस ने ‘काम मांगो अभियान’ भी शुरू किया है, जिसके तहत मनरेगा जॉब कार्डधारी मजदूर ग्राम पंचायतों में काम की मांग करेंगे। यदि तय समय में काम नहीं मिला, तो बेरोजगारी भत्ता मांगने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।