सबरीमाला मंदिर एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। हाल ही में सामने आए सोने की चोरी के मामले के बाद अब नैय्याभिषेकम घी की बिक्री में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। केरल हाईकोर्ट ने इस गंभीर आरोप को देखते हुए ₹35 लाख की संभावित गड़बड़ी की गहन विजिलेंस जांच के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति वी. राजा विजयाराघवन और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार शामिल हैं, ने यह आदेश सबरीमाला विशेष आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर पारित किया। रिपोर्ट में मंदिर में प्रयुक्त नैय्याभिषेकम के बाद बचे ‘आदिया सिष्टम घी’ की बिक्री से प्राप्त धनराशि में अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी।
कितनी राशि की गड़बड़ी?
कोर्ट के अनुसार, 17 नवंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में लगभग ₹35 लाख की वित्तीय अनियमितता का अनुमान लगाया गया है। अदालत ने विजिलेंस निदेशक को सक्षम अधिकारियों की टीम गठित करने और त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (TDB) की रिपोर्ट के आधार पर अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
TDB खाते में जमा नहीं हुआ पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि मारमठ बिल्डिंग काउंटर से बिके 16,628 घी पैकेट्स की राशि TDB खाते में जमा नहीं हुई। प्रत्येक पैकेट 100 मिलीलीटर का था और इसे भक्तों को 100 रुपये में बेचा गया। कुल तैयार किए गए 3,52,050 पैकेट्स में से करीब 89,300 पैकेट्स बिके, लेकिन रिकॉर्ड में केवल 75,450 पैकेट्स की ही राशि जमा दर्शाई गई, जिससे लगभग ₹13.68 लाख की कमी सामने आई।
कर्मचारी पर कार्रवाई
देवास्वोम बोर्ड के अनुसार, कर्मचारी सुनिल कुमार पोत्ती द्वारा कई मामलों में भक्तों को घी की रसीदें जारी नहीं की गईं। नवंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में करीब ₹68,200 की राशि समय पर जमा नहीं हुई, जिसे 17 दिन बाद जमा किया गया। इस लापरवाही के चलते सुनिल कुमार पोत्ती को निलंबित कर दिया गया है और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है।
हाईकोर्ट ने विजिलेंस टीम को एक महीने के भीतर प्रगति रिपोर्ट सौंपने और अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य बताया है।