देश में विधानसभा चुनावों का माहौल तेज हो चुका है। असम, केरल और पुदुचेरी में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक फोकस पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पर आ गया है। विभिन्न दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और चुनावी रैलियों के जरिए जनता को साधने में जुटे हैं।
इसी बीच पश्चिम बंगाल के दमदम में आयोजित एक बड़ी रैली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सख्त तेवर दिखाते हुए कहा कि राज्य को ‘घुसपैठ मुक्त’ बनाना ही इस चुनाव का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि वोट केवल सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किया जाए।
अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए दावा किया कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और राज्य में बदलाव तय है।
वहीं, चुनावी प्रचार के तहत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कोलकाता के जोरासांको क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि राज्य की पहचान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और इसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा कि बंगाल में हालात पहले के उत्तर प्रदेश जैसे हैं, जबकि यूपी में अब शांति और विकास का माहौल है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को बांटने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस बीच तमिलनाडु में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर विवाद सामने आया है। एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक राजनीतिक दल द्वारा ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान ऑनलाइन अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत नियमों का उल्लंघन बताया है।
चुनावी माहौल के बीच विभिन्न राज्यों में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे आगामी चरणों के मतदान और भी दिलचस्प होते जा रहे हैं।