जशपुर जिले में सिकलसेल जागरूकता शिविर की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जिला अस्पताल में की।
इस विशेष शिविर में उन्होंने सिकलसेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों व परिजनों से संवाद किया।
शिविर में जशपुर के अलावा बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर और झारखंड के गुमला जिले से भी मरीज पहुंचे।
यह शिविर न केवल चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रहा है, बल्कि जागरूकता भी फैला रहा है।
बेंगलुरु से पहुंचे विशेषज्ञ डॉक्टर, निःशुल्क एचएलए डीएनए टेस्ट
बेंगलुरु के नारायणा हॉस्पिटल से आए डॉ. सुनील भट्ट ने 12 वर्ष तक के बच्चों का एचएलए डीएनए टेस्ट निःशुल्क किया।
यह टेस्ट बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डोनर की पहचान हेतु अत्यंत आवश्यक है।
इस पहल से मरीजों को उच्चस्तरीय विशेषज्ञता घर के पास ही उपलब्ध हुई।
परामर्श और परीक्षण दोनों मुफ्त उपलब्ध कराए गए, जिससे कई परिवारों को राहत मिली।
अब विदेश वाला महंगा टेस्ट भी मुफ्त
कास फाउंडेशन की काजल सुरेश सचदेव ने सिकलसेल और थैलेसीमिया से संबंधित जागरूकता दी।
उन्होंने बताया कि अब जर्मनी में होने वाला महंगा एचएलए डीएनए टेस्ट भी निःशुल्क उपलब्ध है।
छत्तीसगढ़ शासन और कास फाउंडेशन की साझेदारी से यह संभव हुआ है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी देश के नामी अस्पतालों में निशुल्क करवाया जा रहा है।
209 मरीजों की पहचान, 8 बच्चों का सफल ट्रांसप्लांट
राष्ट्रीय सिकलसेल एवं एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत जशपुर में 0-15 आयु वर्ग के 209 मरीज चिह्नित हुए हैं।
अब तक 110 बच्चों के एचएलए डीएनए टेस्ट किए गए, जिनमें 8 का सफल ट्रांसप्लांट हो चुका है।
यह उपलब्धि सरकार, यूनिसेफ, संगवारी संस्था और कास फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से संभव हुई है।
जिले में सिकलसेल उन्मूलन की दिशा में यह बड़ा कदम है।
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