निमिषा प्रिया फांसी मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। यमन की जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया को फांसी की सजा से बचाने की कोशिशों को एक नई ताकत मिली है, जब भारत के प्रमुख इस्लामी धर्मगुरु ग्रांड मुफ्ती कंठपुरम एपी अबूबकर मुसलियार इस संवेदनशील मामले में सक्रिय रूप से सामने आए हैं।
ग्रांड मुफ्ती के हस्तक्षेप के बाद, अब इस मामले में उम्मीद की एक नई किरण नजर आई है। उनके आग्रह पर यमन में विशेष स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हुआ है, जिसका नेतृत्व यमन के प्रसिद्ध सूफी इस्लामी विद्वान शेख हबीब उमर कर रहे हैं।
🔹 यमन में बंद कमरे में हुई अहम बैठक
शेख हबीब उमर के प्रमुख प्रतिनिधि हबीब अब्दुर्रहमान अली मशहूर ने यमन के उत्तरी हिस्से में एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस गुप्त बैठक में कई बड़े चेहरे शामिल हुए:
- यमन सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि
- आपराधिक न्यायालय के सर्वोच्च न्यायाधीश
- मृतक व्यक्ति तलाल के परिजन
- स्थानीय आदिवासी नेता व समुदाय प्रमुख
हालांकि, इस मीटिंग में क्या निष्कर्ष निकला, इसकी कोई औपचारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। लेकिन बैठक का आयोजन ही इस बात का संकेत है कि मामले को सुलझाने की गंभीर कोशिशें की जा रही हैं।
🔹 भारत से भी बढ़ रहा दबाव
निमिषा प्रिया को यमन में एक व्यक्ति की हत्या के आरोप में सजा सुनाई गई थी। लेकिन भारतीय स्तर पर यह मांग लगातार उठ रही है कि मानवीय आधार पर उसकी सजा को माफ किया जाए या कम किया जाए। धार्मिक समुदायों, मानवाधिकार संगठनों और सरकार स्तर पर भी प्रयास हो रहे हैं।
🔹 क्या अब बच पाएंगी निमिषा प्रिया?
ग्रांड मुफ्ती जैसे ऊंचे इस्लामी पद पर आसीन व्यक्ति के इस मामले में हस्तक्षेप से यह साफ हो गया है कि अब राजनयिक और धार्मिक दोनों रास्तों से हल निकालने की कोशिश हो रही है।
अगर यमन सरकार और मृतक परिवार की सहमति बनती है, तो निमिषा प्रिया की सजा माफ की जा सकती है या बदली जा सकती है। ऐसे में यह हस्तक्षेप निमिषा प्रिया फांसी मामला के समाधान की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।