नक्सली सरेंडर से बड़ा झटका, 5 लाख की ईनामी लक्ष्मी ने छोड़ा हथियार

नक्सली सरेंडर

छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश सीमा पर सक्रिय महिला नक्सली लक्ष्मी ने आखिरकार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह नक्सली सरेंडर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। लक्ष्मी लंबे समय से DKSZC संगठन से जुड़ी हुई थी और बीजापुर जिले के उसुर थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है।

आंध्रप्रदेश के अल्लुरी सीताराम राजू जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लक्ष्मी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह कई वर्षों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थी और सीमा क्षेत्र में संगठन के लिए काम कर रही थी। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे अभियान और पुनर्वास नीति के कारण यह नक्सली सरेंडर संभव हो पाया।

पुलिस के सामने हथियार डाल मुख्यधारा में लौटी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार लक्ष्मी ने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करते हुए अपने हथियार जमा कर दिए। इस नक्सली सरेंडर के बाद प्रशासन ने उसे सरकार की पुनर्वास योजना के तहत सहायता राशि भी प्रदान की। अधिकारियों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लक्ष्मी के आत्मसमर्पण से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ महीनों में लगातार हो रहे नक्सली सरेंडर से संगठन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। पुलिस अब अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की अपील कर रही है।

सरकार की पुनर्वास नीति का दिख रहा असर

छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश में चल रही संयुक्त कार्रवाई के बीच कई नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही पुनर्वास योजनाएं और सुरक्षा बलों का दबाव इस बदलाव की बड़ी वजह माने जा रहे हैं। यही कारण है कि हाल के समय में नक्सली सरेंडर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह अभियान जारी रहा तो आने वाले समय में नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने में बड़ी सफलता मिल सकती है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को सुरक्षा, रोजगार और पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा?

अधिकारियों के मुताबिक लक्ष्मी का आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों की रणनीति और पुनर्वास नीति की सफलता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आगे भी अभियान जारी रहेगा और अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ी सुरक्षा

सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग हिंसा से दूर रहकर विकास की राह चुन सकें।

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