दंतेश्वरी माता दानपेटी खुली और भक्तों की आस्था ने एक बार फिर भावनाओं का सागर बहा दिया। लगभग पांच महीने बाद खोली गई दानपेटी में इस बार न सिर्फ नगद और आभूषण निकले, बल्कि मनोकामना पत्रों की भरमार ने सबका ध्यान खींचा।
इस बार भक्तों ने माता से अनोखी और भावुक मन्नतें मांगीं। किसी ने लिखा – “मां, मेरी गर्लफ्रेंड से शादी करवा दीजिए” तो किसी ने NMDC में नौकरी की मांग रखी। कई पत्रों में परिवार की सुख-शांति की भी प्रार्थनाएं लिखी गई थीं। यह सब दर्शाता है कि दंतेश्वरी माता के मंदिर में केवल चढ़ावा नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीदें भी चढ़ाई जाती हैं।
दान में मिले 11 लाख से ज्यादा की राशि
टेंपल कमेटी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस बार दानपेटी से ₹11,18,194 की नगद राशि प्राप्त हुई। इसके अलावा सोने-चांदी के आभूषण और कई अन्य वस्तुएं भी चढ़ावे में प्राप्त हुई हैं। इससे पहले फरवरी महीने में मंदिर को ₹19,23,723 का दान प्राप्त हुआ था।
दान की गिनती मंदिर परिसर में सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई, जिसमें मंदिर समिति के सदस्य, पुजारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहे।
नवरात्रि में करोड़ों का चढ़ावा
शारदीय नवरात्रि के दौरान दंतेश्वरी मंदिर में भव्य ज्योति कलश जलाए जाते हैं, और इसी समय सबसे अधिक चढ़ावा आता है। टेंपल कमेटी के अनुसार, नवरात्रि में मंदिर को ₹1 करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त होती है। भारत के साथ-साथ विदेशों से भी भक्त इस पर्व पर आस्था व्यक्त करते हैं।
दान से होती है मंदिर की आर्थिक व्यवस्था
मंदिर में मिलने वाला दान केवल भक्ति भावना का प्रतीक नहीं, बल्कि मंदिर की समग्र आर्थिक व्यवस्था को भी सुचारू रखने में मदद करता है। इसी दान से मंदिर के रखरखाव, सजावट, सेवा कार्य और विशेष आयोजनों का संचालन किया जाता है।
इसके अलावा, फागुन मेले के लिए अलग से बजट निर्धारित किया जाता है। मंदिर में चढ़ाई गई चांदी से विशेष सिक्के भी बनवाए जाने लगे हैं, जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं।
दंतेश्वरी मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता
अब दंतेश्वरी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पर्यटन और श्रद्धा का केंद्र बन चुका है। मंदिर के भव्य स्वरूप, स्वच्छ वातावरण और भक्तों की बढ़ती संख्या ने इसे छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल कर दिया है।