डोनाल्ड ट्रंप का भारत की अर्थव्यवस्था को ‘Dead’ कहना न केवल तथ्यहीन है, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक प्रचार मात्र है। सच्चाई यह है कि भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
इसके विपरीत अमेरिका में ट्रंप के शासन में आर्थिक स्थिरता लड़खड़ा गई है। अप्रैल से जुलाई 2025 तक 37,000 से अधिक फैक्ट्री नौकरियां खत्म हो गई हैं। रोजगार दर में गिरावट, बढ़ती महंगाई और आर्थिक विकास में सुस्ती अमेरिका को अंदर से खोखला कर रही है।
ट्रंप बार-बार अपने फैसलों का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी नीतियों से अमेरिका की जनता को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने टैरिफ लागू कर विदेशी व्यापार को नुकसान पहुंचाया, जिससे अमेरिकी उपभोक्ता महंगे उत्पादों के बोझ तले दब गए।
रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि ट्रंप की नीतियों से अमेरिका की नौकरियों, उद्योगों और उत्पादन प्रणाली को झटका लगा है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष पर आरोप लगाकर उन्होंने समस्या को और उलझा दिया है।
भारत आज टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विदेशी निवेशकों के लिए भारत एक मजबूत बाजार बन चुका है। इसलिए ट्रंप द्वारा भारत को ‘Dead Economy’ कहना वास्तविकता से कोसों दूर है।
भारत ने वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भी संतुलन बनाए रखा है, जबकि ट्रंप की अमेरिका अर्थव्यवस्था खुद बुरी तरह डगमगा रही है।