प्रकृति में कई बार ऐसी खोज सामने आती है जो विज्ञान की किताबों में लिखे सामान्य नियमों को चुनौती दे देती है. थाईलैंड के एक घने जंगल में मिली थिस्मिया डेमोना फूल नाम की यह नई प्रजाति भी कुछ ऐसी ही है. यह पौधा न सूरज की रोशनी में भोजन बनाता है, न ज्यादा समय जमीन के ऊपर बिताता है, बल्कि अपना पूरा जीवन मिट्टी और पत्तों के मलबे के नीचे छिपकर गुजार देता है.
यह नई प्रजाति कहां और कैसे मिली
यह खोज थाईलैंड के पश्चिमी हिस्से में स्थित थोंग फा फूम नेशनल पार्क में हुई, जहां चुलालोंगकोर्न यूनिवर्सिटी और प्रिंस ऑफ सोंगक्ला यूनिवर्सिटी के वनस्पति वैज्ञानिकों की टीम सर्वे कर रही थी. इस खोज पर आधारित अध्ययन ओपन-एक्सेस जर्नल फाइटोकीज़ में प्रकाशित हुआ है, जिसमें पौधे की पूरी बनावट और विशेषताओं का विस्तार से जिक्र किया गया है.
इसे “डेविल फ्लावर” जैसा नाम क्यों मिला
इस फूल का रंग ज्यादातर गहरा काला होता है, और इसके ऊपर सींग जैसे नुकीले उभार एक गुंबदनुमा हिस्से से निकलते हैं. फूल के निचले भाग में मौजूद चमकीले लाल-नारंगी धब्बे दूर से देखने पर बिल्कुल आंखों जैसे दिखते हैं, जिससे इसकी शक्ल किसी दानव या भूत जैसी लगने लगती है. यही वजह है कि दुनियाभर में इसे डेविल फ्लावर के नाम से जाना जाने लगा है.
थिस्मिया डेमोना फूल बिना सूरज की रोशनी के जिंदा कैसे रहता है
सामान्य पौधों में क्लोरोफिल पाया जाता है, जिससे वे सूरज की रोशनी का इस्तेमाल कर भोजन बनाते हैं. थिस्मिया डेमोना फूल में क्लोरोफिल पूरी तरह गायब है, इसलिए यह फोटोसिंथेसिस नहीं कर सकता. इसके बजाय यह जमीन के भीतर मौजूद फंगस से सीधे पोषण खींचकर जीवित रहता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में माइकोहेटरोट्रॉफी कहा जाता है. यही वजह है कि यह पौधा लगभग पूरा जीवन मिट्टी के नीचे छिपकर बिताता है और सिर्फ फूल खिलने के छोटे समय के लिए ही सतह पर दिखाई देता है.
इतनी दुर्लभ प्रजाति होने की वजह
अब तक वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के 50 से भी कम पौधे मिले हैं. इतनी सीमित संख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रजाति पहले से ही गंभीर रूप से लुप्तप्राय की श्रेणी में आ सकती है. सीमित इलाके और सीमित संख्या दोनों इसके संरक्षण को एक जरूरी मुद्दा बना देते हैं.
थाईलैंड में अब कितनी थिस्मिया प्रजातियां दर्ज हो चुकी हैं
इस नई खोज को मिलाकर थाईलैंड में अब तक कुल 16 थिस्मिया प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं. यह आंकड़ा साफ बताता है कि थाईलैंड जैसे घने जंगलों में अब भी ऐसी कई प्रजातियां छिपी हो सकती हैं, जिनके बारे में विज्ञान को अब तक कोई जानकारी नहीं है.
इस खोज का बड़ा संदेश क्या है
प्रकृति में ऐसे कई पौधे और जीव मौजूद हैं जो आम नियमों से बिल्कुल अलग तरीके से जीते हैं. यह दुर्लभ फूल इस बात की मिसाल है कि धरती पर अब भी बहुत कुछ अनदेखा और अनजाना बचा हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दुर्लभ खोजें जंगलों के संरक्षण को और ज्यादा जरूरी बना देती हैं, क्योंकि प्राकृतिक आवास खत्म होते ही ऐसी प्रजातियां हमेशा के लिए विलुप्त हो सकती हैं, इससे पहले कि इंसान इन्हें ठीक से समझ भी पाए.
अस्वीकरण: यह जानकारी प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है, और पब्लिश होने की तारीख तक की स्थिति दर्शाती है. आगे शोध में नई जानकारी सामने आ सकती है.
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