चीन टैरिफ विवाद: अमेरिका ने भारत समेत 40 देशों पर लगाया गंभीर आरोप

चीन टैरिफ विवाद

अमेरिका ने भारत समेत 40 से अधिक देशों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ट्रंप प्रशासन की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ देशों का उपयोग चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सामान को तीसरे देशों के रास्ते भेजकर उसकी पहचान बदली जाती है। इसके बाद वही उत्पाद नए देश का बताकर अमेरिका में निर्यात किए जाते हैं। इस पूरे मामले ने चीन टैरिफ विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।

व्हाइट हाउस की रिपोर्ट का नाम ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ रखा गया है। इसमें कहा गया है कि यह तरीका कई वर्षों से अपनाया जा रहा है। रिपोर्ट में भारत, कनाडा, यूरोपीय संघ, वियतनाम, ताइवान, जापान, मैक्सिको और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों का उल्लेख किया गया है।

मुख्य बातें

  • अमेरिका ने 40 से अधिक देशों पर संभावित ट्रांसशिपमेंट का आरोप लगाया।
  • रिपोर्ट में चीन पर टैरिफ से बचने की रणनीति अपनाने का दावा किया गया।
  • भारत सहित कई व्यापारिक साझेदारों का नाम शामिल है।
  • AI आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है।
  • कस्टम जांच को और सख्त बनाने की तैयारी है।

ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क कैसे करता है काम?

रिपोर्ट के अनुसार, चीन पहले अपने उत्पाद किसी तीसरे देश में भेजता है। वहां मामूली प्रोसेसिंग, री-पैकेजिंग, री-लेबलिंग या नए दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। इसके बाद उत्पाद को उस देश का बताकर अमेरिका भेजा जाता है।

पीटर नवारो ने दावा किया कि 2018 में सेक्शन 301 के तहत लगाए गए अमेरिकी टैरिफ के बाद इस तरह की गतिविधियों में वृद्धि हुई। उनका कहना है कि इससे चीन अतिरिक्त शुल्क से बचने की कोशिश करता रहा है।

चीन टैरिफ विवाद पर अमेरिका की नई रणनीति

व्हाइट हाउस अब अमेरिकी कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन के साथ मिलकर AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू कर रहा है। यह तकनीक शिपमेंट डेटा, रूटिंग हिस्ट्री और व्यापारिक पैटर्न का विश्लेषण करेगी। यदि किसी माल की उत्पत्ति संदिग्ध पाई जाती है, तो उस पर कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के कारण कई देशों की भूमिका बढ़ी है। हालांकि, केवल किसी देश के माध्यम से व्यापार होने से नियमों का उल्लंघन साबित नहीं होता। प्रत्येक मामले की जांच अलग-अलग आधार पर की जाती है।

क्या है आगे की चुनौती?

  • AI के जरिए संदिग्ध शिपमेंट की पहचान होगी।
  • सीमा शुल्क जांच पहले से अधिक सख्त होगी।
  • वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
  • कई देशों को व्यापारिक दस्तावेजों में अधिक पारदर्शिता रखनी होगी।

यह भी पढ़ें: आजादी की धुन समारोह में गूंजा देशभक्ति संदेश, मुख्यमंत्री साय ने दिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *