नेपाल के देवीघाट में नेपाल जलप्रलय के बाद कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस बीच लापता हुए दो बच्चों की सुरक्षित वापसी ने एक परिवार को बड़ी राहत दी। सेना के जवान दोनों बच्चों को लेकर उनके घर पहुंचे। बच्चों को देखकर मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
नेपाल जलप्रलय के बीच बच्चों की तलाश हुई पूरी
देवीघाट निवासी अनीता के दोनों बच्चे नदी के दूसरी ओर स्थित स्कूल गए थे। इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी। पुल बह जाने के कारण गांव का संपर्क टूट गया। बिजली भी गुल हो गई थी।
ऐसे हालात में परिवार बच्चों की तलाश के लिए बाहर नहीं जा सका। काफी समय तक बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में सेना के जवान बच्चों को सुरक्षित लेकर घर पहुंचे।
अनीता ने कहा कि घर दोबारा बनाया जा सकता है। बच्चों का सुरक्षित लौटना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है। बच्चों को सामने देखकर परिवार ने राहत की सांस ली
बहन नहीं बांध पाई थी भाई को राखी
बच्चों की बहन सपना ने भी इस दौरान अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने बताया कि वह भाई को राखी नहीं बांध पाई थीं। बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलने से परिवार परेशान था।
बाद में सेना की ओर से बच्चों को लेकर आने की सूचना मिली। इसके बाद परिवार की चिंता खुशी में बदल गई। नेपाल जलप्रलय के बीच बच्चों की सुरक्षित वापसी परिवार के लिए राहत का बड़ा पल बन गई।
सपना ने कहा कि सेना से मिली यह सूचना उनके जीवन की यादगार घटनाओं में रहेगी। भावुक होते हुए उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की।
गौरव ने खोया मां और दिव्यांग पिता को
इसी त्रासदी में देवीघाट के मासूम गौरव मिर्जा की कहानी बेहद दर्दनाक है। गौरव पहले ही अपनी मां को खो चुके थे। अब उनके दिव्यांग पिता भी नदी की तेज धारा में बह गए।
जलप्रलय के बाद गौरव राहत शिविर में रह रहे हैं। उनके चाचा नूरी मिर्जा नुवाकोट से उनकी मदद के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने गौरव को अपने साथ रखने की बात कही।
नूरी मिर्जा ने कहा कि वह गौरव की देखभाल पिता की तरह करेंगे। यह कहते हुए वह भावुक हो गए।
नेपाल जलप्रलय ने उजाड़े कई परिवार
गौरव ने बताया कि वह घटना के समय स्कूल में थे। घर लौटने पर उन्हें चारों तरफ तबाही दिखाई दी। बाद में उन्हें पता चला कि उनका घर नदी में बह गया। उनके पिता भी नदी की तेज धारा में चले गए।
नेपाल जलप्रलय ने देवीघाट समेत प्रभावित क्षेत्रों में कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। किसी ने अपना घर खोया, तो किसी ने अपनों को। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को सहारे की जरूरत बनी हुई है।
सेना के प्रयास से परिवार को मिली राहत
देवीघाट में बच्चों की सुरक्षित वापसी ने राहत और बचाव कार्यों के महत्व को सामने रखा। कठिन परिस्थितियों में सेना के जवानों ने बच्चों को खोजकर उनके परिवार तक पहुंचाया।
एक ओर कई परिवार तबाही से जूझ रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर अपनों की सुरक्षित वापसी उन्हें उम्मीद दे रही है। नेपाल जलप्रलय जैसी आपदा के बीच राहत कार्य प्रभावित लोगों के लिए बड़ी मदद साबित हो रहे हैं।
उम्मीद और अपनों के लौटने की खुशी
आपदा के बाद घर और संपत्ति का नुकसान परिवारों के लिए बड़ा आघात है। हालांकि, अपनों की सुरक्षित वापसी सबसे बड़ी राहत बनती है।
देवीघाट में बच्चों की घर वापसी ने इसी उम्मीद को मजबूत किया। मां ने भी यही कहा कि घर फिर बनाया जा सकता है। बच्चों का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी है।
एक नजर में:
- देवीघाट में बाढ़ से भारी तबाही हुई।
- दो बच्चे स्कूल जाने के बाद लापता हो गए थे।
- सेना ने दोनों बच्चों को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया।
- गौरव मिर्जा ने अपने माता-पिता को खो दिया।
- चाचा नूरी मिर्जा ने गौरव की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
- राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को सहारे की जरूरत है।
मुख्य बातें: - देवीघाट में दो बच्चे बाढ़ के बाद लापता हुए थे।
- सेना के जवान बच्चों को सुरक्षित घर लेकर पहुंचे।
- पुल बहने से गांव का संपर्क टूट गया था।
- बिजली गुल होने से परेशानी और बढ़ गई थी।
- बच्चों की वापसी से परिवार में खुशी का माहौल बना।
कुल मिलाकर, नेपाल जलप्रलय की त्रासदी के बीच बच्चों की सुरक्षित घर वापसी उम्मीद की तस्वीर सामने लाती है। वहीं, गौरव जैसे बच्चों की कहानी आपदा की भयावहता को दिखाती है। ऐसे समय में राहत, बचाव और मानवीय सहयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
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