सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार से चार गंभीर सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या रोहिंग्याओं को शरणार्थी का दर्जा मिलना चाहिए, और अगर हां, तो क्या उन्हें सभी मौलिक अधिकार प्रदान किए जाने चाहिए?
‘ऑपरेशन पुशबैक’ के तहत सरकार बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर निकाल रही है। इसी बीच, कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि यह केवल अवैध घुसपैठ का मामला नहीं है, बल्कि मानवीय अधिकारों से जुड़ा मुद्दा भी है।
सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण और कॉलिन गोंजाल्विस ने कोर्ट में दलील दी कि भारत सरकार शरणार्थी और अवैध प्रवासियों में फर्क नहीं कर पा रही है, जो कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है।
सितंबर में इन चार सवालों पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि रोहिंग्याओं का भारत में भविष्य क्या होगा।