नवा रायपुर स्थित टीआरटीआई में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी ने भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में समाज और राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, जो सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
50 से अधिक जनजातीय प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
इस जनजातीय गरिमा उत्सव में स्वतंत्रता संग्राम, शिक्षा, कला, संस्कृति, साहित्य, शोध, खेलकूद और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 50 से अधिक जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज की उपलब्धियों को पहचान दिलाना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना रहा।
स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को मिला गौरव
कार्यक्रम में भूमकाल क्रांति, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को भी सम्मानित किया गया। जनजातीय गरिमा उत्सव के दौरान यह सम्मान समारोह समाज के गौरवशाली इतिहास को याद करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बना।
शिक्षा और प्रतिभा को मिला प्रोत्साहन
इस अवसर पर कक्षा 10वीं और 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों के साथ-साथ जेईई मेन और नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में सफल हुए छात्रों को भी सम्मानित किया गया। जनजातीय गरिमा उत्सव ने युवाओं को शिक्षा और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
वक्ताओं ने कहा कि उत्सव जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को पहचान देने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। यह पहल सामाजिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और युवा सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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