रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक नया मोड़ आ गया है। रूस ने 21 नवंबर को पहली बार यूक्रेन पर मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। इस बीच, यूक्रेन के पूर्व कमांडर इन चीफ ने तीसरे विश्वयुद्ध के खतरे की ओर इशारा किया है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने अब एक नया रुख ले लिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 21 नवंबर को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि मॉस्को ने यूक्रेन पर पहली बार मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। पुतिन ने चेतावनी दी कि ऐसी और मिसाइल हमलों की संभावना बनी हुई है। यह हमला उस समय हुआ जब यूक्रेन ने हाल ही में अमेरिकी ATACMS और ब्रिटिश स्टॉर्म शैडो मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, जिनकी मंजूरी अमेरिका ने दी थी।

इस नए घटनाक्रम से युद्ध अब नए दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है, जहां रूस ने उत्तरी कोरिया से हजारों सैनिकों को अपने पक्ष में लिया है। ये सैनिक अब रूस की सेना के साथ मिलकर यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे हैं, और इनकी तैनाती यूक्रेन में भी हो सकती है। इस स्थिति को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत हो सकती है?
भारत की भूमिका
भारत, जो हमेशा से ही अपने तटस्थ रुख के लिए जाना जाता है, इस स्थिति में क्या कदम उठाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। भारत ने अभी तक इस संघर्ष में स्पष्ट पक्ष नहीं लिया है, लेकिन वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका पर सबकी निगाहें हैं। भारत को इस समय अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपनी विदेश नीति पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
युद्ध का यह नया चरण न केवल यूक्रेन और रूस के लिए, बल्कि समूचे विश्व के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। इस तरह के घटनाक्रमों के कारण वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिससे तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका भी बढ़ रही है।