बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चैतन्य द्वारा एसीबी की गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका को जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया।
इस फैसले के बाद अब चैतन्य की गिरफ्तारी की संभावना और बढ़ गई है। इससे पहले भी उनकी याचिका खारिज हो चुकी थी और उन्हें एसीबी कोर्ट जाने की छूट दी गई थी। लेकिन एसीबी कोर्ट से भी राहत न मिलने के बाद उन्होंने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें फिर निराशा हाथ लगी।
मामले में सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी और अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि चैतन्य बघेल ने शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुँचाया है और यह गंभीर प्रवृत्ति का अपराध है। कोर्ट ने उनके तर्कों से सहमति जताते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
साथ ही चैतन्य बघेल ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा दर्ज एफआईआर और कार्रवाई को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस पर कई दिनों तक चली लंबी बहस के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। ईडी की ओर से अधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडेय ने कहा कि चैतन्य की संलिप्तता स्पष्ट है और गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है।
इस फैसले ने मामले को और गंभीर बना दिया है और अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस घोटाले को लेकर बहस और तेज हो गई है।