संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा वर्ष 2025 के परीक्षा परिणाम घोषित होते ही देशभर में सफल अभ्यर्थियों की कहानियां सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ग्राम बेलटूकरी निवासी संजय डहरिया ने 946वीं रैंक हासिल कर अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। संजय की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जीवन की बेहद कठिन परिस्थितियों और गंभीर बीमारी का सामना करते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
संजय डहरिया ने तीसरे प्रयास में यह उपलब्धि प्राप्त की है। जैसे ही उनके चयन की खबर सामने आई, परिवार, रिश्तेदारों और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। संजय ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, सहपाठियों और दोस्तों को दिया है। उनका कहना है कि कठिन समय में सभी ने उनका मनोबल बढ़ाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
महासमुंद जिले के छोटे से गांव बेलटूकरी में जन्मे संजय के पिता लखनलाल डहरिया किसान हैं, जबकि उनकी मां रेशम डहरिया गृहिणी हैं। तीन भाई और एक बहन में संजय सबसे छोटे हैं। परिवार में एक भाई शिक्षक हैं, जबकि दूसरा भाई खेती-किसानी से जुड़े हैं।
संजय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के शासकीय विद्यालय से प्राप्त की। कक्षा पांचवीं में पढ़ाई के दौरान उनका चयन नवोदय विद्यालय माना में हुआ, जहां उन्होंने कक्षा 5वीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद महासमुंद के शासकीय महाविद्यालय वल्लभाचार्य से उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक (BA Economics) की पढ़ाई पूरी की और इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी।
संजय की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। वर्ष 2009 में उनका चयन एसबीआई की शाखा में हुआ, जहां उन्होंने 2011 तक सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ दी। इसी दौरान वर्ष 2012 में उन्हें लार ग्रंथि में कैंसर का पता चला। यह समय उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इलाज के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी।
इलाज के दौरान भी उन्होंने हार नहीं मानी। इस बीच उनका चयन आईडीबीआई बैंक रायपुर में हुआ, जहां उन्होंने 2013 से 2017 तक काम किया। बाद में उन्होंने पोस्ट ऑफिस महासमुंद के बैंकिंग सेक्टर में भी सेवाएं दीं, लेकिन UPSC की तैयारी के लिए उन्होंने वह नौकरी भी छोड़ दी।
वर्ष 2012 से 2018 तक मुंबई में उनका कैंसर का इलाज चलता रहा, लेकिन बीमारी भी उनके सपनों के आगे टिक नहीं सकी। संजय ने वर्ष 2022 से UPSC परीक्षा देना शुरू किया। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और तीसरे प्रयास के लिए पूरी लगन से तैयारी की।
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और UPSC 2025 में उन्होंने 946वीं रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहरा दिया। संजय का कहना है कि यदि उन्हें IAS कैडर मिलता है तो वे पूरी निष्ठा के साथ देश की सेवा करेंगे।
संजय की इस उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे सहित कई लोगों ने उन्हें बधाई दी है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। संजय की प्रेरणादायक कहानी यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी कठिन परिस्थिति को पार किया जा सकता है।