कच्चा तेल महंगा, राहत बरकरार: सरकार बोली- सप्लाई पूरी तरह सामान्य

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। जनवरी में जहां भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 63 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अप्रैल तक यह बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, देशभर के पेट्रोल पंपों पर किसी भी प्रकार की कमी नहीं है और सभी रिफाइनरियां अपनी पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारत में ईंधन की कीमतें अभी भी कई पड़ोसी देशों की तुलना में संतुलित स्तर पर हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर दबाव अपेक्षाकृत कम है।

घरेलू रसोई गैस (LPG) को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सिलेंडरों की उपलब्धता पर्याप्त है और किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर कमी की शिकायत नहीं मिली है। वर्तमान में गैस डिलीवरी की दक्षता करीब 93 प्रतिशत है। हालांकि, ऑनलाइन बुकिंग में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जो अब प्रतिदिन लगभग 45 से 46 लाख के बीच बनी हुई है। वहीं, कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बहाल हो चुकी है।

सरकार ने प्रवासी और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई है। इसके तहत देशभर में हजारों जागरूकता शिविर लगाए गए हैं और लाखों छोटे सिलेंडर वितरित किए जा चुके हैं।

प्राकृतिक गैस क्षेत्र में भी स्थिति संतोषजनक बताई गई है। पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति 100 प्रतिशत बनाए रखी गई है। हाल के महीनों में लाखों नए उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने एलपीजी से पीएनजी की ओर रुख किया है।

सरकार ने यह भी बताया कि ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। हाल ही में देशभर में हजारों औचक निरीक्षण किए गए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके। साथ ही डेयरी क्षेत्र सहित अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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