भारत और रूस के रिश्ते एक बार फिर सुर्खियों में हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दूसरे दिन दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम मिलने की संभावना दिख रही है। व्यापार और कूटनीति के साथ-साथ इस बार सबसे अधिक फोकस रक्षा क्षेत्र पर है — जहां भारत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर तेज़ी से आगे बढ़ना चाहता है।
🇮🇳🇷🇺 भारत-रूस रक्षा संबंध कितने गहरे?
भारत 20वीं सदी से ही अपनी रक्षा आपूर्ति के लिए रूस पर भरोसा करता आया है। लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों, बंदूकों और मिसाइल प्रणालियों के मामलों में रूस भारत का सबसे बड़ा और टिकाऊ साझेदार रहा है। हाल के वर्षों में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और AK-203 राइफल समझौते ने इस सहयोग को नई मजबूती दी है।
🤝 कौन-कौन से समझौते कर रहे हैं रिश्तों को मजबूत?
2021–2031 सैन्य तकनीकी सहयोग कार्यक्रम के तहत दोनों देश संयुक्त अनुसंधान, उत्पादन, रखरखाव और सैन्य उपकरणों की तकनीक को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।
भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-MTC) और 2+2 संवाद मंच इस साझेदारी की नियमित समीक्षा करते हैं, जिसमें रक्षा और विदेश मंत्री उच्चस्तर पर भाग लेते हैं।
🔥 मौजूदा प्रमुख रक्षा परियोजनाएँ
फिलहाल दोनों देशों के बीच सक्रिय रणनीतिक परियोजनाएँ—
- टी-90 टैंकों का लाइसेंस उत्पादन
- सुखोई-30 MKI का घरेलू निर्माण
- कामोव (Ka-31) हेलीकॉप्टर की आपूर्ति
- AK-203 राइफल उत्पादन (मेक इन इंडिया मॉडल)
- ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल का संयुक्त उत्पादन और निर्यात योजना
भारत पारंपरिक खरीदार की भूमिका से आगे बढ़कर अब संयुक्त डिजाइन, विकास और निर्माण मॉडल पर काम कर रहा है — जो रक्षा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को गति दे रहा है।
🛡 पुतिन के दौरे से भारत की रक्षा उम्मीदें
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत विशेष रूप से निम्न तकनीकों को लेकर रूसी सहयोग चाहता है:
- S-500 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम
- Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट
- अत्याधुनिक पनडुब्बी तकनीक
- हाइपरसोनिक मिसाइल अनुसंधान
⚔ सेनाओं का संयुक्त ऑपरेशन भी जारी
सिर्फ उपकरण ही नहीं, दोनों देशों की सेनाएँ भी सक्रिय साझेदारी निभा रही हैं।
तीनों सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास INDRA इसका बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा भारत और रूस वोस्तोक एक्सरसाइज और अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेलों में भी भाग लेते हैं।