हॉकी वर्ल्ड कप से पहले एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) ने भारत के खिलाफ मैच खेलने को लेकर सीधे फैसला लेने के बजाय अपनी सरकार से सलाह लेने की बात कही है, जिससे खेल में राजनीति की दखलंदाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
दरअसल, इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) द्वारा जारी ड्रॉ के अनुसार भारत और पाकिस्तान को 16 टीमों वाले टूर्नामेंट के ‘पूल डी’ में रखा गया है। दोनों टीमों के बीच 19 अगस्त को मुकाबला प्रस्तावित है, लेकिन इस पर अब अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। PHF अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में पूरी तरह से सरकार के निर्देशों का पालन करेंगे।
यह टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड्स में आयोजित होगा और खास बात यह है कि 2018 के बाद यह पाकिस्तान का पहला हॉकी वर्ल्ड कप होगा। इससे पहले पाकिस्तान 2014 और 2022 संस्करण के लिए क्वालिफाई नहीं कर सका था।
PHF फिलहाल एक अंतरिम व्यवस्था के तहत काम कर रहा है और 27 मार्च को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। पूर्व ओलंपियन समीउल्लाह के अनुसार, भारत-पाकिस्तान मैच एक संवेदनशील विषय है, इसलिए इस पर सरकार की राय लेना जरूरी है।
भारत और पाकिस्तान के बीच खेल संबंध लंबे समय से राजनीतिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। 2008 के मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज बंद है, हालांकि बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में दोनों टीमें आमने-सामने आती रही हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने कई बार बड़े टूर्नामेंट्स से नाम वापस लेने या बहिष्कार की धमकी दी, लेकिन अंत में उसे अपने फैसले बदलने पड़े। क्रिकेट के बाद अब हॉकी में भी ऐसे संकेत देखने को मिल रहे हैं।
मैदान पर प्रदर्शन की बात करें तो भारत का पलड़ा भारी नजर आता है। हाल के मुकाबलों में भारत ने पाकिस्तान को लगातार पांच बार हराया है, जिसमें 2022 एशियन गेम्स में 10-2 की बड़ी जीत भी शामिल है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान फिर से खेल में राजनीति लाएगा या खेल भावना को प्राथमिकता देते हुए मैदान में उतरेगा? फिलहाल सभी की नजरें PHF की आगामी बैठक और सरकार के फैसले पर टिकी हैं।