छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गीदम से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित नागफनी मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह मंदिर चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां की गई मन्नतें विशेष रूप से चर्म रोग, निःसंतानता, मासिक धर्म की समस्या और घरेलू क्लेश को दूर करने में सहायक होती हैं।
नागवंशी इतिहास और अद्भुत मूर्तिकला
यह भव्य मंदिर छिंदक नागवंशीय शासकों द्वारा 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बनवाया गया था। मंदिर की शिल्पकला अद्भुत है—यहाँ नाग-नागिन, नरसिंह, नृत्यांगना, गणेश, सूर्य देव, राम-लक्ष्मण, कृष्ण-बलराम और भोलेनाथ की दुर्लभ मूर्तियाँ स्थापित हैं। गर्भगृह में विराजित शेषनाग की विशाल मूर्ति आज भी आस्था का प्रतीक है।
प्राकृतिक संरक्षण और सांपों का निवास
नागफनी के जंगलों में आज भी नागों को प्राकृतिक संरक्षण मिला हुआ है। गाँव में नागों की हत्या वर्जित मानी जाती है और नाग को देवी-देवता के रूप में पूजा जाता है। यदि गलती से किसी नाग की मृत्यु हो जाए, तो दोषी परिवार मंदिर आकर धातु का सांप चढ़ाकर क्षमा याचना करता है।
चमत्कारी मान्यताएँ और पूजा विधि
- सोमवार को नाग देव विशेष रूप से भक्तों को दर्शन देते हैं।
- नाग पंचमी के दिन यहाँ विशाल मेला, झाँकियाँ, और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं।
- स्थानीय पुजारी के अनुसार, कई भक्तों की गंभीर बीमारियाँ इस मंदिर में मन्नत माँगने के बाद ठीक हो चुकी हैं।