भारत-ब्रिटेन एफटीए समझौता: आर्थिक साझेदारी में ऐतिहासिक मील का पत्थर
भारत और ब्रिटेन के बीच भारत ब्रिटेन एफटीए समझौता अब अंतिम रूप में पहुंच चुका है, जो अब तक की सबसे बड़ी द्विपक्षीय डील मानी जा रही है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार की बाधाएं हटेंगी और निवेश को मजबूती मिलेगी।
दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार तक शुल्क से जुड़ी जटिलताओं को हल करने की कोशिश की, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के पीएम कीयर स्टार्मर के बीच गुरुवार को होने वाली बैठक में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार रात लंदन के लिए रवाना हुए। यह उनकी चौथी ब्रिटेन यात्रा है, जो व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस भारत ब्रिटेन एफटीए समझौता पर सहमति मई 2025 में बन चुकी थी, लेकिन कानूनी और शुल्कीय मुद्दों को अंतिम रूप देने में वक्त लगा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के मुताबिक, इस समझौते में अधिकांश उत्पाद शुल्क ढांचे में शामिल रहेंगे और केवल कुछ ही उत्पाद इससे बाहर होंगे।
भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि रूस से ऊर्जा खरीद पर ब्रिटेन या यूरोपीय संघ के किसी भी प्रतिबंध को भारत स्वीकार नहीं करेगा। भारत के लिए अपनी जनता की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सर्वोपरि प्राथमिकता है।
हाल ही में यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। भारत स्थित रूसी कंपनी रोसनेफ्त की रिफाइनरी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे भारत की रणनीति पर असर पड़ सकता है। लेकिन भारत ने यह साफ किया कि वह किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड को नहीं मानेगा।
भारत ब्रिटेन एफटीए समझौता से दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि, आयात-निर्यात की प्रक्रिया में सरलता और नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, भारतीय बाजार को ब्रिटिश टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से फायदा मिलेगा।
यह समझौता न सिर्फ आर्थिक विकास का मार्ग खोलेगा बल्कि वैश्विक कूटनीतिक रिश्तों को भी एक नई ऊंचाई देगा। इस तरह यह समझौता भारत और ब्रिटेन दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।