दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को हजारों किसान एक बार फिर इकट्ठा हुए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी अधिकार बनाए जाने की मांग की। किसानों का कहना है कि बिना एमएसपी की गारंटी के खेती को लाभकारी व्यवसाय में नहीं बदला जा सकता।
✦ किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने सरकार से दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
- एमएसपी को कानूनी अधिकार घोषित किया जाए, ताकि उन्हें अपनी फसलों का उचित मूल्य पाने के लिए हर बार आंदोलन न करना पड़े।
- किसानों को एकमुश्त कर्ज से मुक्ति दी जाए, जिससे वे आर्थिक तंगी से बाहर निकलकर खेती पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
✦ किसानों की आवाज़
पंजाब से आए सुखविंदर सिंह ने कहा कि सरकार ने अब तक बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ के कर्ज माफ कर दिए हैं, जबकि देशभर का किसानों का कुल कर्ज 15 लाख करोड़ से अधिक नहीं है। ऐसे में किसानों को कर्जमुक्त करना सरकार का कर्तव्य है।
वहीं, हरियाणा के किशन पाल चौधरी ने कहा कि किसान सम्मान निधि की राशि बहुत कम है। सरकार को हर किसान परिवार को कम से कम 12,000 रुपये सालाना सहायता देनी चाहिए।
✦ अमेरिका समझौते पर किसानों की चिंता
जंतर-मंतर पर किसानों ने अमेरिका के साथ हो रहे संभावित समझौते को लेकर भी आशंका जताई। उनकी मांग है कि कृषि और डेरी उत्पादों को किसी भी समझौते से बाहर रखा जाए। किसान नेता मंजीत सिंह ने कहा कि अमेरिका का किसान व्यवसायी है जिसे सरकार का पूरा सहयोग मिलता है, जबकि भारत का 99% किसान परिवार चलाने के लिए खेती करता है।
✦ बड़ा आंदोलन बनने के संकेत?
किसानों की एकजुटता और उनके तेवर देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह आंदोलन एक बार फिर 2020-21 की तरह बड़ा स्वरूप लेगा। किसानों का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे।