राजधानी दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण अब केवल स्वास्थ्य संकट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी दिखने लगा है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली के थोक व्यापार में करीब 75 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। खराब हवा और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम के चलते देशभर से आने वाले व्यापारी फिलहाल दिल्ली आने से बच रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, पहले प्रतिदिन तीन से चार लाख व्यापारी खरीदारी के लिए दिल्ली के प्रमुख थोक बाजारों में पहुंचते थे। लेकिन वर्तमान में प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने के कारण बाजारों में रौनक कम हो गई है। इसका सीधा नुकसान कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, होलसेल फूड, स्टेशनरी और गिफ्ट आइटम जैसे कई सेक्टर्स को हो रहा है।
गंभीर प्रदूषण का असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इन्हीं कारणों से लोग अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं, जिसका असर खुदरा बाजारों पर भी पड़ा है।
सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सड़कों पर पानी का छिड़काव, जल-वाष्प मशीनों का उपयोग, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर रोक, गैर-बीएस-6 वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध, साथ ही स्कूलों और कार्यालयों में ऑनलाइन व्यवस्था व वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद राजधानी की हवा अब भी गंभीर श्रेणी में बनी हुई है।
व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से निपटने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है, बल्कि इसमें व्यापारियों और नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। उनका सुझाव है कि बाजारों के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव जैसे कदम उठाकर व्यापारी भी प्रदूषण कम करने में सहयोग कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में क्रिसमस और नए साल का मौसम शुरू होने वाला है, जब आमतौर पर बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए व्यापारियों को डर है कि अगर प्रदूषण इसी तरह बना रहा, तो नए साल में भी व्यापार को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। साथ ही, नए साल के जश्न के लिए दिल्ली आने वाले पर्यटकों की संख्या भी घट सकती है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
कुल मिलाकर, प्रदूषण ने दिल्ली के व्यापार और अर्थव्यवस्था के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे निपटने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयासों की जरूरत है।