केंद्र सरकार ने देश में व्यापक सुधारों को तेज गति देने के लिए दो नए अनौपचारिक मंत्री समूहों का गठन किया है। इन समूहों का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।
अमित शाह को आर्थिक क्षेत्रों में सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। इस समूह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कुल 13 सदस्य शामिल किए गए हैं। रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को इसका संयोजक बनाया गया है। यह समूह वित्त, उद्योग, वाणिज्य, अवसंरचना, रसद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शासन से जुड़े सुधारों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सामाजिक कल्याण और सुरक्षा सुधारों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस 18-सदस्यीय समूह में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, आवास, श्रम और जन स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर गहन चर्चा की जाएगी। इस समूह में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और श्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया को संयोजक नियुक्त किया गया है।
इन समूहों का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद किया गया है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में अगली पीढ़ी के सुधारों पर बल देते हुए कहा था कि मौजूदा नियमों और नीतियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप बदला जाना चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश था कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सुधारों की नई राह तय करनी होगी।
सरकार ने दोनों समूहों को हर महीने रिपोर्ट प्रस्तुत करने और तीन महीने के भीतर एक समेकित सुधार रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग इन समूहों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।
स्पष्ट है कि यह पहल भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने और सामाजिक-आर्थिक ढांचे को और सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम है।