महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का हालिया बयान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा है कि आज की राजनीति में विचारधारा का महत्व लगातार घटता जा रहा है, जबकि धन और बाहुबल का प्रभाव खुलकर सामने आ रहा है। पवार के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक हालात पर सीधी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
पीटीआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अजीत पवार ने आरोप लगाया कि अधिकांश राजनीतिक दल अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुके हैं। उन्होंने कहा कि दल-बदल अब आम हो गया है, जहां नेताओं को या तो प्रलोभन देकर या फिर दबाव बनाकर पाला बदला जा रहा है। पवार के मुताबिक, कुछ मामलों में नेताओं पर लंबित जांचों का हवाला देकर उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता है कि दल बदलने पर मामलों का “प्रबंधन” कर दिया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि आज उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनके काम और नेतृत्व क्षमता के बजाय उनकी चुनावी जीत की संभावना के आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दल अब सर्वेक्षणों के जरिए यह तय करते हैं कि कौन-सा उम्मीदवार सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, और यदि वह विपक्ष में हो तो उसे अपने पाले में लाने की कोशिश की जाती है।
आगामी नगर निगम चुनावों से पहले पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगमों में भाजपा के स्थानीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारी खर्च के बावजूद दूरदर्शिता की कमी के कारण दोनों शहरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि एनसीपी राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में अजीत पवार का यह बयान न सिर्फ राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले सियासी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।