दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना प्रदूषण पर जताई नाराजगी

दिल्ली हाई कोर्ट ने जताई सख्ती
दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना नदी में गंदा पानी छोड़े जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि वे इस विषय में 7 अगस्त तक एक संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
कोर्ट में पेश विशेष समिति की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 37 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद हैं। लेकिन इनमें से कई ट्रीटमेंट प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे। इस कारण भारी मात्रा में अनुपचारित सीवेज यमुना में सीधे बहाया जा रहा है।

सुनवाई में अदालत की तीखी टिप्पणी
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए स्पष्ट किया कि यमुना में केवल शुद्ध पानी ही छोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को बड़े पैमाने पर प्रयास करने होंगे।

जलभराव और ट्रैफिक पर भी असर
बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या ट्रैफिक पर बुरा प्रभाव डाल रही है। अदालत ने कहा कि दिल्ली का सीवरेज सिस्टम पूरी तरह से असफल होता नजर आ रहा है और यह स्थिति बेहद निराशाजनक है।

7 अगस्त को बैठक करने के आदेश
कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि दिल्ली जल बोर्ड, नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली औद्योगिक विकास निगम के अधिकारी 7 अगस्त को एक संयुक्त बैठक करें। इस बैठक में यमुना की सफाई और सीवरेज सुधार से जुड़ी ठोस योजनाओं पर विचार किया जाएगा।

संयुक्त रिपोर्ट में होंगे ये बिंदु
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि बैठक के बाद जो संयुक्त रिपोर्ट पेश की जाएगी, उसमें यह उल्लेख होना चाहिए कि यमुना में स्वच्छ जल छोड़ने के लिए क्या-क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

डिजिटल युग में बढ़ता संकट
सिर्फ यमुना ही नहीं, बल्कि डिजिटल युग में साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। बीते चार वर्षों में साइबर क्राइम के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश इस खतरे के बड़े हॉटस्पॉट बन चुके हैं।

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