आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को विपक्ष ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उनका सीधा मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से होगा।
इस घोषणा की जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को दी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव एक वैचारिक लड़ाई है। विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से बी सुदर्शन रेड्डी को संयुक्त उम्मीदवार के रूप में चुना है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि बी सुदर्शन रेड्डी देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने न्यायिक करियर में संविधान और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कई ऐतिहासिक फैसले दिए।
सुदर्शन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश, गुवाहाटी उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में सेवाएँ दीं। उन्होंने हमेशा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का समर्थन किया।
खड़गे ने कहा कि सुदर्शन रेड्डी गरीबों की आवाज़ को न्याय दिलाने वाले न्यायविद रहे हैं। उनके फैसले पढ़कर यह स्पष्ट होता है कि वे हमेशा कमजोर वर्गों और वंचितों के पक्ष में खड़े हुए।
वहीं, पिछले सप्ताह एनडीए ने अपने उम्मीदवार के रूप में सीपी राधाकृष्णन का नाम घोषित किया। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत हैं।
67 वर्षीय राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं और लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं और अब उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार हैं।
लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों वाले निर्वाचक मंडल में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का स्पष्ट बहुमत है। इसलिए राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक इस चुनाव को वैचारिक लड़ाई के रूप में लड़ना चाहता है। सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। यह चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विचारधारा की टक्कर का प्रतीक होगा।
आगामी दिनों में समर्थन जुटाने की कवायद और तेज होगी। इस मुकाबले ने राजनीति में नई सरगर्मी ला दी है। अब देखना होगा कि उपराष्ट्रपति पद की यह लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।