अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर बड़ा कानूनी मोड़ आया है। Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा आपात शक्तियों के तहत लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयात शुल्क निर्धारित करने की संवैधानिक शक्ति अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
हालांकि फैसले के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने व्यापार कानून की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत का नया अस्थायी आयात शुल्क लागू कर दिया। यह शुल्क अधिकतम 150 दिनों के लिए प्रभावी रह सकता है।
भारत पर क्या असर?
फैसले के बाद लगभग 55 प्रतिशत भारतीय निर्यात, जो पहले 18 प्रतिशत शुल्क के दायरे में था, अब 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ के अंतर्गत आ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दर पूर्व प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते से कम है।
हालांकि स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों पर पुराने उच्च शुल्क बरकरार हैं। वहीं दवाइयों और स्मार्टफोन जैसे उत्पादों पर पूर्ववत छूट जारी रहने की संभावना है।
व्यापार समझौते का क्या होगा?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर अभी अंतिम हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal के अनुसार वार्ता जारी है और अगले चरण में कानूनी पाठ को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने तत्काल राहत दी है, परंतु दीर्घकालिक टैरिफ संरचना अब अमेरिकी प्रशासन के आगामी कानूनी कदमों पर निर्भर करेगी।