वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर एक बार फिर चर्चा में है। मंदिर के पास हाल ही में छज्जा गिरने की घटना के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बांकेबिहारी मंदिर संरचना में कई स्थानों पर दरारें, कमजोर दीवारें और अतिरिक्त भार जैसी समस्याएं सामने आई हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
ASI सर्वे में क्या-क्या मिला?
हाई पावर्ड कमेटी के निर्देश पर किए गए तकनीकी सर्वेक्षण में मंदिर की संरचनात्मक स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक भवन की नींव और ऊपरी हिस्सों में कमजोरी के संकेत मिले हैं।
दीवारों और छज्जों में दिखीं दरारें
सर्वे टीम ने पाया कि मंदिर के कई छज्जों और दीवारों में दरारें विकसित हो चुकी हैं। यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं।
छत पर बढ़ा भार बना चिंता का कारण
रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर की छत पर पानी की टंकियां, आरओ सिस्टम, लोहे के गर्डर और अन्य भारी उपकरण लगाए गए हैं, जिससे बांकेबिहारी मंदिर संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
तत्काल हटाने की सिफारिश
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सभी भारी उपकरणों को जल्द से जल्द हटाया जाए ताकि भवन पर भार कम हो और उसकी मजबूती बनी रहे।
भीड़ और अव्यवस्था से बढ़ रहा खतरा
हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। सीमित स्थान और बढ़ती भीड़ के कारण भवन पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
बिना योजना किए गए बदलाव
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि परिसर में लोहे की सीढ़ियां, पाइप और अन्य संरचनाएं बिना उचित योजना के स्थापित की गई हैं। इससे बांकेबिहारी मंदिर संरचना की मूल डिजाइन प्रभावित हो रही है।
ASI ने सुझाए ये बड़े बदलाव
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मंदिर की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
प्रमुख सिफारिशें
- छत पर मौजूद भारी टंकियां और उपकरण हटाए जाएं।
- क्षतिग्रस्त छज्जों और बालकनियों को सपोर्ट दिया जाए।
- रसोई और प्रशासनिक कार्यालय को अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
- परिसर में लगी लोहे की जालियों और गर्डरों को व्यवस्थित किया जाए।
- श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रास्तों को चौड़ा किया जाए।
IIT रुड़की और ASI करेंगे संयुक्त अध्ययन
रिपोर्ट में भविष्य के लिए विस्तृत तकनीकी जांच की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत IIT रुड़की और ASI की संयुक्त टीम द्वारा गहन अध्ययन कराया जा सकता है।
दीर्घकालिक संरक्षण पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि बांकेबिहारी मंदिर संरचना को सुरक्षित रखने के लिए केवल मरम्मत ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरक्षण योजना भी आवश्यक है।
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