छत्तीसगढ़ में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का आंदोलन नए मोड़ पर पहुँच गया है। राजधानी के तूता धरना स्थल पर आंदोलनरत तहसीलदारों ने आज रक्तदान कर सरकार से अपनी 17 सूत्रीय मांगों को मानने की अपील की। “संसाधन नहीं तो काम नहीं” के नारे के साथ चल रहे इस आंदोलन से प्रदेशभर के तहसील कार्यालयों में कामकाज ठप हो गया है। हजारों जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में देरी हो रही है, जिससे आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं।
अब तक इस गंभीर आंदोलन को लेकर सरकार की तरफ से कोई वार्ता शुरू नहीं हुई है। तहसीलदारों की मांगें प्रशासनिक ढांचे, स्टाफिंग, न्यायिक सुरक्षा, ग्रेड पे सुधार, और पदोन्नति से जुड़ी हैं। इनमें नायब तहसीलदार को राजपत्रित घोषित करने, तहसीलों में कंप्यूटर ऑपरेटर व अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति, तहसीलदारों के लिए शासकीय वाहन, न्यायालय सुरक्षा, और राजस्व मामलों में स्पष्ट गाइडलाइन की मांग प्रमुख हैं। संघ की मान्यता और विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग भी रखी गई है ताकि राजस्व न्यायालयों की स्थिति को सुदृढ़ किया जा सके।