देश की सर्वोच्च न्यायालय ने 1991 के पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए सहमति प्रदान की है। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने संकेत दिया कि उपयुक्त तिथि निर्धारित की जाएगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत किया गया कि केंद्र सरकार को वर्ष 2022 में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, किन्तु अब तक हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस पर पीठ ने कहा कि वर्तमान में नौ-न्यायाधीशों की पीठ के मामलों की सूचीबद्धता के पश्चात इन याचिकाओं की सुनवाई तिथि तय की जाएगी।
कार्यवाही के दौरान अजमेर दरगाह से संबंधित प्रकरण में निचली अदालत को प्रभावी आदेश पारित करने से रोकने की मांग भी की गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आदेश सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों के विपरीत होगा तो उसका परीक्षण किया जाएगा।
इससे पूर्व 12 दिसंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर की अदालतों को धार्मिक स्थलों से जुड़े नए मुकदमों को स्वीकार न करने और लंबित मामलों में प्रभावी आदेश पारित न करने का निर्देश दिया था।
उल्लेखनीय है कि पूजा स्थल कानून 15 अगस्त 1947 की स्थिति के अनुसार धार्मिक स्थलों के स्वरूप को यथावत बनाए रखने का प्रावधान करता है। अयोध्या विवाद को इस अधिनियम से अपवाद रखा गया था।