भारत में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR जारी है। एसआईआर में कितने नाम कटे यह सवाल अब चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कई राज्यों में ड्राफ्ट रोल से बड़ी संख्या में नाम हटे हैं। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से हटाया गया नाम अंतिम रूप से हटाया गया नाम नहीं माना जाता। संबंधित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल रखना है। साथ ही अपात्र नामों को हटाना भी प्रक्रिया का हिस्सा है। तीसरे चरण में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था। इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन होना था।
SIR में कितने नाम कटे और सबसे ज्यादा असर कहां?
1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्राफ्ट रोल में 13 करोड़ से ज्यादा नाम कम हुए थे। दिल्ली और महाराष्ट्र में इसका बड़ा असर सामने आया। दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 1.45 करोड़ से घटकर करीब 97.53 लाख रह गई। महाराष्ट्र में यह संख्या 9.78 करोड़ से घटकर 7.71 करोड़ हुई।
दिल्ली में करीब 47.6 लाख नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर हुए। यह आंकड़ा पूर्व SIR मतदाता संख्या के करीब 33 प्रतिशत के बराबर था। हालांकि, चुनाव आयोग की प्रक्रिया में ऐसे मामलों पर दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं।
महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं थे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम विलोपन का आंकड़ा नहीं है। दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के बाद स्थिति बदल सकती है।
SIR में कितने नाम कटे, आंकड़ों को कैसे समझें?
SIR के दौरान नाम कम होने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें मृत्यु, स्थान परिवर्तन, अनुपस्थिति और डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल हैं। चुनाव आयोग के निर्देशों में ऐसे मामलों की पहचान का प्रावधान है।
इसलिए ड्राफ्ट रोल में नाम नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए हट गया। संबंधित मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकता है।
किन राज्यों में SIR पूरा हुआ और कहां जारी है?
SIR को अलग-अलग चरणों में लागू किया गया है। बिहार में पहला चरण जून से सितंबर 2025 के बीच पूरा हुआ था। इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल और गोवा समेत राज्यों में दूसरा चरण चला।
तीसरे चरण में 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए। चुनाव आयोग ने इसके लिए मई 2026 में आदेश जारी किया था। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए कार्यक्रम बाद में तय किया जाना था।
तीसरे चरण में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर से प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में अन्य राज्यों में भी सत्यापन और ड्राफ्ट रोल की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में क्या स्थिति सामने आई?
दिल्ली के ड्राफ्ट रोल में 47.6 लाख नाम कम हुए हैं। इनमें अलग-अलग कारणों से सूची में बदलाव हुआ। संबंधित मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति की प्रक्रिया रखी गई है।
महाराष्ट्र में भी करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं थे। चुनाव आयोग ने इसे अंतिम विलोपन नहीं बताया है। इसलिए अंतिम सूची आने से पहले आंकड़े बदल सकते हैं।
राज्यों में SIR की समयसीमा भी अलग-अलग है। इसलिए सभी राज्यों के आंकड़ों की तुलना एक ही तारीख से करना जरूरी है।
दावे और आपत्तियों का क्या है प्रावधान?
ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाता है। दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामलों की जांच की जाती है।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का लक्ष्य किसी पात्र नागरिक को सूची से बाहर रखना नहीं है। आयोग ने इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बताया है।
SIR को लेकर विवाद क्यों है?
SIR को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न समूहों की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ विपक्षी दलों ने दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया बताता है। आयोग का घोषित उद्देश्य पात्र नागरिकों को शामिल करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।
इसलिए एसआईआर में कितने नाम कटे समझते समय ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच अंतर समझना जरूरी है।
मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?
- ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांचें।
- नाम नहीं मिलने पर संबंधित प्रक्रिया की जानकारी लें।
- जरूरत होने पर दावा या आपत्ति निर्धारित समय में दाखिल करें।
- दस्तावेजों और व्यक्तिगत जानकारी में किसी गलती को तुरंत सुधारें।
आगे क्या होगा?
- अलग-अलग राज्यों में दावे और आपत्तियों का निपटारा होगा।
- सत्यापन के बाद अंतिम मतदाता सूचियां प्रकाशित होंगी।
- कुछ नाम दोबारा अंतिम सूची में शामिल हो सकते हैं।
- अंतिम आंकड़ों से ही वास्तविक बदलाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर, एसआईआर में कितने नाम कटे इसका आंकड़ा चरण और तारीख के अनुसार बदल रहा है। उपलब्ध ड्राफ्ट आंकड़ों में 13 करोड़ से अधिक नाम कम होने की रिपोर्ट सामने आई है। दिल्ली और महाराष्ट्र में भी बड़े बदलाव दर्ज हुए हैं। हालांकि, ड्राफ्ट रोल अंतिम मतदाता सूची नहीं है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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