ईंधन निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव, पेट्रोल पर टैक्स खत्म; डीजल और एटीएफ महंगे

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वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन के निर्यात शुल्क में संशोधन किया है। नए फैसले के तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को शून्य कर दिया गया है। दूसरी ओर, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। इस कदम का असर देश की रिफाइनरियों और ईंधन निर्यात से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है।

पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की नई दरें क्या हैं?

सरकार के नए फैसले में तीनों ईंधनों के निर्यात शुल्क में अलग-अलग बदलाव किए गए हैं। पेट्रोल पर शुल्क पूरी तरह समाप्त किया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर दरें बढ़ाई गई हैं।

  • पेट्रोल: निर्यात शुल्क ₹2.50 प्रति लीटर से घटाकर शून्य।
  • डीजल: शुल्क ₹8.50 से बढ़ाकर ₹11.50 प्रति लीटर।
  • एटीएफ: शुल्क ₹10.50 से बढ़ाकर ₹11 प्रति लीटर।

इस संशोधन के बाद पेट्रोल निर्यातकों को शुल्क से राहत मिली है। वहीं, डीजल और विमानन ईंधन के निर्यात पर पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात शुल्क की व्यवस्था लागू की थी। सरकार इन दरों की समय-समय पर समीक्षा करती है। पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर शुल्क में मौजूदा बदलाव भी इसी व्यवस्था के तहत किया गया है।

निर्यात शुल्क बढ़ने से डीजल और एटीएफ को विदेश भेजने की लागत बढ़ सकती है। वहीं, पेट्रोल पर शुल्क हटने से इसके निर्यातकों को राहत मिलेगी। हालांकि, अधिसूचना में इस बार अलग-अलग ईंधनों की दरों में बदलाव के पीछे विस्तृत कारण नहीं बताए गए हैं।

क्या घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?

यह बदलाव ईंधन के निर्यात पर लागू है। इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अपने आप बढ़ या घट जाएंगी। घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले ईंधन पर लागू शुल्क अलग व्यवस्था के तहत आते हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को इस फैसले को सीधे पेट्रोल-डीजल के पंप मूल्य में बदलाव के रूप में नहीं देखना चाहिए।

वैश्विक बाजार पर रहेगी सरकार की नजर

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के हालात और ईंधन की मांग में होने वाले बदलावों का असर निर्यात नीति पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की ओर से दरों की समीक्षा जारी रह सकती है। ताजा संशोधन से स्पष्ट है कि ईंधन निर्यात शुल्क के जरिए सरकार अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर अलग-अलग दरें लागू कर रही है।





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