छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 पर जनता से मांगे सुझाव

एशियन गेम्स 2026

छत्तीसगढ़ सरकार ने शोर नियंत्रण कानून से जुड़े प्रस्तावित विधेयक के प्रारंभिक प्रारूप पर सुझाव मांगे हैं। गृह विभाग की ड्राफ्ट कमेटी ने इसका प्रारूप तैयार किया है। नागरिकों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों को राय रखने का अवसर दिया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के लिए मौजूदा कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में संशोधन का प्रारूप तैयार किया गया है। सरकार ने विधेयक को सार्वजनिक चर्चा के लिए उपलब्ध कराया है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त करना है।

शोर नियंत्रण कानून का प्रारूप ऑनलाइन उपलब्ध

प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। इसे पुलिस विभाग की वेबसाइट के नोटिस और प्रेस रिलीज सेक्शन में अपलोड किया गया है। नागरिक वहां जाकर प्रारूप का अध्ययन कर सकते हैं।

किसी प्रावधान को लेकर आपत्ति या सुझाव होने पर संबंधित पक्ष अपनी बात रख सकते हैं। इसमें आम नागरिकों के अलावा संस्थाएं और विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

सरकार ने सुझाव देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया भी बताई है। इससे प्राप्त प्रतिक्रियाओं को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।

शोर नियंत्रण कानून पर 30 दिन में देनी होगी राय

राज्य शासन ने सुझाव और आपत्तियां देने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की है। इस अवधि में नागरिक प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन कर सकते हैं।

विशेषज्ञ और संबंधित संस्थाएं भी अपनी राय भेज सकती हैं। सुझाव देते समय संबंधित प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया से प्रस्तावित विधेयक पर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आएगी। इसके बाद शासन स्तर पर प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा।

सुझाव और आपत्ति कहां भेजें?

नागरिक और संस्थाएं अपनी आपत्तियां तथा सुझाव शासन को भेज सकते हैं। इसके लिए गृह एवं जेल विभाग का निर्धारित पता जारी किया गया है।

सुझाव प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, गृह एवं जेल विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर के पते पर भेजे जा सकते हैं।

संबंधित पक्षों को तय अवधि का ध्यान रखना होगा। सुझाव भेजने से पहले विधेयक के प्रारूप को पढ़ना भी जरूरी है।

प्रस्तावित कानून में जनता की भागीदारी

शोर नियंत्रण कानून से जुड़े प्रारूप को सार्वजनिक करने से नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है। सरकार ने आम जनता के साथ विशेषज्ञों और हितधारकों को भी प्रक्रिया में शामिल किया है।

प्रस्तावित विधेयक अभी प्रारंभिक प्रारूप के स्तर पर है। इसलिए नागरिक संबंधित प्रावधानों पर अपने सुझाव दे सकते हैं।

सुझावों और आपत्तियों के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण शासन तक पहुंचेंगे। इससे प्रस्तावित व्यवस्था पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया प्राप्त होगी।

सुझाव भेजने वालों के लिए जरूरी बातें

  • पुलिस विभाग की वेबसाइट पर प्रारूप देखें।
  • हिंदी या अंग्रेजी में उपलब्ध दस्तावेज पढ़ें।
  • संबंधित प्रावधान पर स्पष्ट राय दें।
  • सुझाव 30 दिनों की अवधि में भेजें।
  • निर्धारित सरकारी पते का उपयोग करें।

शोर नियंत्रण कानून से संबंधित प्रस्तावित विधेयक पर फिलहाल सुझाव लेने की प्रक्रिया चल रही है। नागरिक और संबंधित संस्थाएं निर्धारित समय में अपनी राय भेज सकती हैं।

प्रारूप पर मिली प्रतिक्रियाओं के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। इस प्रक्रिया में जनता और संबंधित पक्षों की भागीदारी को जगह दी गई है।


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