प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान का तीन देशों का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। इस यात्रा के जरिए भारत पश्चिम एशिया और अफ्रीका में अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
दौरे का पहला पड़ाव जॉर्डन है, जहां भारत और जॉर्डन अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी की जॉर्डन की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है। यहां आतंकवाद-रोधी सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पहले से मजबूत हैं और आने वाले समय में आर्थिक सहयोग को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी अफ्रीकी देश इथियोपिया जाएंगे, जो वैश्विक दक्षिण और अफ्रीका में भारत का अहम साझेदार माना जाता है। यह पीएम मोदी का पहला इथियोपिया दौरा होगा। कृषि, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास साझेदारी पर केंद्रित यह यात्रा भारत-अफ्रीका संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है। इथियोपिया में भारतीय निवेश और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग पहले से ही मजबूत स्थिति में है।
दौरे का अंतिम और सबसे अहम पड़ाव ओमान होगा, जहां भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) यानी संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लग सकती है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो दोनों देशों के व्यापार और निवेश को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का प्रमुख रक्षा और रणनीतिक साझेदार भी है, जिससे रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में रिश्ते और गहरे होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन देशों का दौरा भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने, व्यापारिक अवसर बढ़ाने और रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।