छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से संचालित मोबाइल यूनिट आधारित पशु चिकित्सा सेवा ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। अब बीमार या घायल पशुओं के उपचार के लिए पशुपालकों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है। मोबाइल चिकित्सा वाहन गांवों तक पहुंचकर निःशुल्क उपचार, टीकाकरण और तकनीकी परामर्श उपलब्ध करा रहे हैं। इससे पशुधन संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों की आजीविका को भी मजबूती मिल रही है।
मोबाइल यूनिट से मिल रही घर के पास सुविधा
राज्य शासन के निर्देशानुसार संचालित पशु चिकित्सा सेवा के तहत मोबाइल इकाइयां तय रोस्टर के अनुसार गांवों में पहुंच रही हैं। इन यूनिटों में पशु चिकित्सक, पैरावेट और चालक-सह-अटेंडेंट तैनात हैं। अत्याधुनिक उपकरणों और आवश्यक दवाओं से लैस ये वाहन पशुओं का उपचार करने के साथ-साथ औषधि वितरण और स्वास्थ्य जांच भी कर रहे हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों को विशेष लाभ मिल रहा है।
लाखों पशुओं को मिला उपचार और टीकाकरण
बलरामपुर जिले में मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा के तहत अब तक 14 हजार से अधिक शिविर लगाए जा चुके हैं। इन शिविरों में 1.67 लाख से अधिक पशुओं का उपचार और 1.38 लाख से ज्यादा पशुओं का टीकाकरण किया गया है। इसके अलावा हजारों पशुओं को दवाएं वितरित की गई हैं तथा कृत्रिम गर्भाधान और बधियाकरण जैसी सेवाएं भी प्रदान की गई हैं। यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है।
1962 हेल्पलाइन बनी पशुपालकों की संजीवनी
राज्य सरकार की 1962 टोल फ्री हेल्पलाइन पशु चिकित्सा सेवा को और अधिक प्रभावी बना रही है। पशुपालक जैसे ही इस नंबर पर कॉल करते हैं, मोबाइल टीम मौके पर पहुंचकर बीमार, घायल या दुर्घटनाग्रस्त पशुओं का उपचार करती है। इस व्यवस्था से पशुओं की मृत्यु दर में कमी आई है और पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल रही है।
आय बढ़ाने में भी निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका
मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा केवल स्वास्थ्य सुविधाएं ही नहीं दे रही बल्कि पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन, रोग नियंत्रण और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध करा रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण दुग्ध, मांस और अंडा उत्पादन में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
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