निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर राज्यपाल ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार

निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक

रायपुर स्थित लोकभवन में राज्यपाल रमेन डेका से राज्य के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्यपाल ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य बातें

  • राज्यपाल से निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की।
  • नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना पर हुई चर्चा।
  • संशोधन विधेयक के प्रावधानों पर विचार-विमर्श।
  • उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर।
  • शिक्षा क्षेत्र में बेहतर अवसरों पर हुई चर्चा।

निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के प्रावधानों पर मंथन

बैठक में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के विभिन्न प्रावधानों पर विचार किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव भी साझा किए।

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का विस्तार समय की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा संस्थानों की भूमिका को भविष्य निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक से बढ़ेगी उच्च शिक्षा की संभावनाएं

इसमें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, आधुनिक शैक्षणिक ढांचे और बेहतर शैक्षणिक वातावरण पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने कहा कि नई पहल से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर भी विकसित होंगे।

बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मैट्स विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गजराज पगारिया, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय के सीईओ चिन्मय दावड़ा तथा कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रो. कुलाधिपति हरजीत सिंह हूरा उपस्थित रहे।

प्रमुख बिंदु

  • नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना पर चर्चा।
  • उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर।
  • संशोधन विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा।
  • विश्वविद्यालयों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

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