26 दिनों तक चले आंदोलन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। सरकार की ओर से तीन महत्वपूर्ण मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर में परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी।
सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक भरोसे के बजाय लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे। इसके अलावा, विभिन्न दलों के 65 सांसदों ने भी अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
मुख्य बातें
- सरकार ने तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया।
- छात्रों पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का भरोसा मिला।
- परीक्षा सुधार पर संसद में विस्तृत चर्चा होगी।
- आंदोलन को समर्थन देने वालों का सोनम वांगचुक ने आभार जताया।
सरकार ने किन मांगों को स्वीकार किया?
सरकार ने लिखित रूप से भरोसा दिया कि जंतर-मंतर और संसद मार्च में शामिल छात्रों पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। साथ ही, पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया गया।
इसके अलावा, संसद में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर विस्तृत चर्चा कराने की बात भी स्वीकार की गई। इन आश्वासनों को आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सोनम वांगचुक अनशन पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार ने कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने माना कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रखना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बन सकता था।
उन्होंने कहा कि हजारों लोगों ने उन्हें आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए स्वस्थ रहने की सलाह दी। इसी कारण उन्होंने लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
आगे क्या होगा?
- संसद में परीक्षा सुधार पर चर्चा होने की संभावना।
- छात्रों से जुड़े मामलों की समीक्षा की जाएगी।
- प्रभावित परिवारों को मुआवजा प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
- परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नए सुझाव सामने आ सकते हैं।
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