NEET Paper Leak Case: सुप्रीम कोर्ट में CBT मोड की मांग तेज

NEET Paper Leak

देशभर में चर्चा का विषय बने NEET Paper Leak मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिका में NEET-UG परीक्षा को तुरंत कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा पेन-पेपर सिस्टम पूरी तरह असुरक्षित साबित हो चुका है और लगातार हो रहे पेपर लीक ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।

पेन-पेपर सिस्टम खत्म करने की उठी मांग

याचिका में कहा गया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज के दौरान कई स्तरों पर सुरक्षा जोखिम बने रहते हैं। इसी वजह से NEET Paper Leak जैसी घटनाएं सामने आती हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि पारंपरिक पेन-पेपर मोड को खत्म कर डिजिटल परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।

इसके साथ ही, परीक्षा संचालन के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और AI आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी अपील की गई है, ताकि नकल और लीक जैसी घटनाओं पर रोक लग सके।

2027 तक इंतजार क्यों? सरकार के फैसले पर सवाल

याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार पहले ही 2027 से NEET परीक्षा को CBT मोड में कराने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब डिजिटल सिस्टम ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है, तो इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा रहा।

याचिकाकर्ताओं का मानना है कि NEET Paper Leak की लगातार घटनाओं को देखते हुए सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए। उनका कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला होने के कारण देरी उचित नहीं है।

21 जून के री-टेस्ट को ऑनलाइन कराने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट को भी ऑनलाइन मोड में आयोजित कराने की मांग की गई है। छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल माध्यम को बेहतर विकल्प बताया गया है।

इसके अलावा, NTA की जगह एक नई स्वतंत्र और जवाबदेह संस्था बनाने की भी मांग उठी है। याचिका में कहा गया है कि नई एजेंसी कानूनी रूप से जवाबदेह हो और उसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी हो।

उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाने की अपील

NEET Paper Leak मामले में याचिकाकर्ताओं ने एक हाई-लेवल मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने की मांग भी की है। इस समिति में रिटायर्ड जज, साइबर एक्सपर्ट, वैज्ञानिक और शिक्षा विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

साथ ही, पेपर लीक में शामिल लोगों और कोचिंग संस्थानों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक जांच कराने तथा CBI से चार हफ्तों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगे जाने की अपील की गई है।

क्या है पूरा मामला?

3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। आरोप है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया था। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी।

अब NEET Paper Leak मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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