छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से बिजली विभाग में बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रवेली वितरण केंद्र में कार्यरत एक कार्यालय सहायक पर करीब 3.17 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगा है। यह पूरा फर्जीवाड़ा वर्ष 2019-20 से 2022-23 के बीच लगातार चलता रहा।
कैसे हुआ करोड़ों का गबन
जांच में सामने आया है कि आरोपी मनोज कुमार साहू ने राजस्व राशि को सिस्टम में दर्ज कर नकद ब्योरा (कैश लॉट) और सीआरए तैयार किए, जिससे कागजों में सब कुछ सही दिखाई देता रहा। लेकिन हकीकत में यह रकम कभी बैंक में जमा ही नहीं हुई। इस तरह धीरे-धीरे करोड़ों रुपये गायब होते रहे।
155 मामलों में मिली गड़बड़ी
अधिकारियों के अनुसार, कुल 155 मामलों में अनियमितता पाई गई है। इनमें से 136 मामलों में नकद ब्योरा और राजस्व लेखा दोनों बनाए गए, जबकि 19 मामलों में राजस्व लेखा तक तैयार नहीं किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी मामले में संबंधित राशि बैंक में जमा नहीं मिली।
फर्जी बैंक स्लिप और जाली हस्ताक्षर से छिपाया घोटाला
घोटाले को छिपाने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी बैंक स्लिप का इस्तेमाल किया गया। फाइलों में सिर्फ स्लिप की फोटोकॉपी लगाई गई थी, जबकि असली दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। जांच में कई स्लिप्स में तारीख और रकम में ओवरराइटिंग भी पाई गई। इसके अलावा, कनिष्ठ अभियंता के नाम पर जाली हस्ताक्षर कर दस्तावेजों को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
पुलिस में शिकायत, जांच शुरू
इस पूरे मामले को लेकर सहायक अभियंता सुनील कुमार गुप्ता ने 25 अप्रैल को पिपरिया थाना में शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी अमित कुमार कश्यप के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही उससे पूछताछ की जाएगी।
कबीरधाम बिजली विभाग घोटाला: 4 साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा